वाई तालुका में पटाखा बिक्री के सुरक्षा नियमों की अनदेखी, लोग पूछ रहे प्रशासन की पकड़ कहां
दिवाली से पहले वाई तालुका में पटाखा दुकानों पर सुरक्षा नियम पाले जा रहे हैं या नहीं, इस पर नागरिकों ने प्रशासन से सवाल उठाए हैं।
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दिवाली के मौके पर पटाखों की बिक्री के लिए सरकार और संबंधित प्रशासन ने सख्त सुरक्षा नियम और शर्तें तय की हैं। इसके बावजूद वाई तालुका में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी होती दिख रही है, ऐसा नागरिकों का कहना है। लोग गुस्से में पूछ रहे हैं कि बिक्री की जगहों पर सुरक्षा के मानक पाले जा रहे हैं या नहीं, इसकी असल में जांच कौन करेगा और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कौन करेगा।
नियमों के मुताबिक पटाखा बिक्री के लिए बनाए जाने वाले शेड जलने वाली चीजों से दूर और सुरक्षित होने चाहिए। वहां किसी बाहरी या गैर-अधिकृत आदमी का घुसना भी नहीं होना चाहिए। दो शेड के बीच कम से कम तीन मीटर का फासला जरूरी है। किसी संरक्षित इमारत या जगह से कम से कम 50 मीटर की दूरी रखनी होती है। एक समूह में 50 से ज्यादा दुकानें रखने की भी मनाही है। सवाल यह है कि ये नियम जमीन पर कितने पाले जा रहे हैं।
पटाखा बिक्री के इलाके में खुले दिए, कंदील, मोमबत्ती और धूम्रपान पर साफ रोक है। फिर भी इसका पूरा ध्यान रखा जाता है क्या, यह पूछा जा रहा है। बिजली की वायरिंग सुरक्षित है या नहीं, हर दुकान की कतार के लिए अलग स्विच और एक मुख्य स्विच है या नहीं, यह भी सवाल है। दुकानों के सामने पटाखों के डिब्बे, खाली बक्से या जलने वाला सामान तो नहीं पड़ा है, इसकी प्रशासन सख्ती से जांच कर रहा है क्या? नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या सिर्फ इजाजत दे देने से प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है।
शर्तों में यह भी साफ लिखा है कि दुकान में फालतू माल का स्टॉक और ग्राहकों की भीड़ न हो। दुकान में 13 से ज्यादा ग्राहक नहीं रखने हैं। इमरजेंसी में बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह खुला रहना चाहिए। जरूरत भर के अग्निशामक यंत्र और पानी की बाल्टियां रखनी हैं, और विक्रेताओं व कामगारों को आग से बचाव की ट्रेनिंग मिली होनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि ये शर्तें जमीन पर लागू हो रही हैं या सिर्फ कागज पर हैं।
पटाखा बिक्री के लिए LE-3 और LE-5 लाइसेंस की शर्तें और Explosives Rules, 2008 के संबंधित नियम मानना जरूरी है। क्लोरेट वाले प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और स्टोरेज पर भी रोक है। सिर्फ वही पटाखे बेचे जा सकते हैं जिन पर अधिकृत निर्माता का लेबल, इस्तेमाल की हिदायतें और सुरक्षा की जानकारी हो। ध्वनि प्रदूषण की तय सीमा का पालन भी जरूरी है।
125 dB(AI) से ज्यादा आवाज वाले पटाखों पर पाबंदी है, तो बाजार में बिक रहे पटाखों की जांच कौन करेगा? आवाज की सीमा नापने का कोई इंतजाम प्रशासन के पास है क्या? या दिवाली के जोश में नियमों की आवाज ही दबा दी जा रही है? पटाखे बेहद ज्वलनशील और खतरनाक होते हैं, इसलिए बिक्री की जगह पर आग से सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।
कोई हादसा हुआ तो कुछ ही मिनटों में बड़ी आग भड़कने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सवाल है कि बिक्री की जगह तय करते वक्त फायर सिस्टम, इमरजेंसी रास्ते, दुकानों के बीच की दूरी और भीड़ संभालने के इंतजाम की मौके पर जाकर जांच हुई या नहीं। इसका जवाब प्रशासन को जनता के सामने देना चाहिए। एक तरफ प्रशासन नियमों की लंबी लिस्ट जारी करता है और दूसरी तरफ बाजार में उन पर अमल नहीं होता, तो यह व्यवस्था आखिर किसके लिए है, ऐसा सवाल उठ रहा है।
नागरिक पूछ रहे हैं कि नियम टूट रहे हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं होती और जांच करने वाली टीमें कहां हैं। लाइसेंसों की असल में पड़ताल हुई है या नहीं, और फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट ली गई है या नहीं, यह भी पूछा जा रहा है। कल कोई हादसा हो गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी, यह सवाल भी उठाया जा रहा है।
नागरिकों की मांग है कि वाई तालुका में पटाखा बिक्री की जगहों की फौरन संयुक्त जांच की जाए और सुरक्षा नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई हो। उनका कहना है कि अब प्रशासन के कागज पर नियम दिखाने की जगह मैदान में उतरकर कार्रवाई करने का वक्त आ गया है। नियम जनता के लिए हैं या सिर्फ कागज के लिए, और पटाखा विक्रेताओं को इजाजत देते वक्त सुरक्षा कहां है, प्रशासन की पकड़ आखिर कहां खो गई है, इन सवालों के जवाब अब वाई के लोग प्रशासन से चाहते हैं।
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