खामगाव में कपास किसानों के लिए CCI का शिविर, 'कपास किसान' ऐप की दी जानकारी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
भारतीय कपास निगम ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह में खामगाव के औदार्या एग्रो इंडस्ट्रीज में किसानों को खरीद प्रक्रिया, डिजिटल सुविधाओं और HDPS की जानकारी दी।
कपास खरीद में पारदर्शिता बनी रहे, किसानों को डिजिटल सुविधाओं की जानकारी मिले और आधुनिक खेती की तकनीक से कपास की पैदावार बढ़े, इसी मकसद से भारतीय कपास निगम की ओर से खामगाव में किसान जनजागृति शिविर लगाया गया। सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत यह शिविर बुधवार को खामगाव के औदार्या एग्रो इंडस्ट्रीज में हुआ।
शिविर में भारतीय कपास निगम की अकोला शाखा के सतर्कता अधिकारी सुनीलकुमार पात्रा, खामगाव केंद्र के केंद्रप्रभारी आदित्य वामन, नितीन साकरकर, कृषि उपज बाजार समिति के अधिकारी और फैक्टरी मैनेजर संजूभाऊ घोगरे मौजूद थे। आसपास के इलाके के किसान भी बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम का मुख्य मकसद यह था कि किसानों को कपास बेचने की प्रक्रिया समझ में आए और वे निगम की अलग-अलग योजनाओं का फायदा उठा सकें।
इसी दौरान निगम की तरफ से कपास खरीद को ज्यादा पारदर्शी और असरदार बनाने के लिए शुरू किए गए 'कपास किसान' मोबाइल ऐप की पूरी जानकारी दी गई। बताया गया कि डिजिटल माध्यम इस्तेमाल करने से किसानों के लिए खरीद से जुड़ी प्रक्रिया समझना आसान हो सकता है। इसलिए किसानों से कहा गया कि वे मौजूद डिजिटल सुविधाओं को जानें और उनका अच्छे से इस्तेमाल करें।
कार्यक्रम में यह बात खास तौर पर रखी गई कि खरीद के लेन-देन में पारदर्शिता रखने, किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने और गलतफहमियां दूर करने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। किसानों से यह अपील भी की गई कि कपास की बिक्री से जुड़े नियम, प्रक्रिया और सुविधाओं की जानकारी वे समय पर ले लें।
बदलते खेती के हालात में उपलब्ध तकनीक का सही इस्तेमाल कर पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को आधुनिक तरीकों की जानकारी रखना जरूरी बताया गया। ऐसे में इस तरह के शिविरों की भूमिका अहम मानी गई। किसानों को कपास उत्पादन की तकनीकी बातें समझाने के साथ उनकी दिक्कतें जानने पर भी जोर दिया गया। सतर्कता जागरूकता सप्ताह के मौके पर हुए इस शिविर में किसानों के हित की रक्षा, खरीद में पारदर्शिता और डिजिटल सुविधाओं के ज्यादा इस्तेमाल को प्राथमिकता दी गई।
शिविर में आए किसानों ने कपास खरीद प्रक्रिया और खेती से जुड़ी कई समस्याएं सामने रखीं। कुछ बातों पर शंकाएं उठाकर उन्होंने अधिकारियों से जानकारी भी ली। संबंधित अधिकारियों ने किसानों के सवालों के जवाब दिए। मकसद यही था कि किसानों को सही जानकारी मिले और खरीद प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो।
कपास की पैदावार बढ़ाने के लिए सिर्फ बुवाई काफी नहीं है। फसल का सही प्रबंधन, आधुनिक तकनीक अपनाना और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखकर शिविर में उत्पादकता बढ़ाने के जरूरी उपाय बताए गए। साथ ही सघन रोपण पद्धति यानी HDPS और आधुनिक खेती की तकनीक के बारे में भी किसानों को समझाया गया।
किसानों और संबंधित व्यवस्था के बीच जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ाना और आधुनिक खेती के तरीकों को लेकर जागरूकता लाना इस पहल का अहम हिस्सा रहा। कपास उगाने वाले किसानों को खरीद प्रक्रिया की सही जानकारी मिले और पैदावार बढ़ाने में नई तकनीक की मदद ले सकें, इसी वजह से भारतीय कपास निगम की यह जनजागृति पहल अहम मानी गई।
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