त्वचा पर लालिमा और सूजन को हल्के में न लें, संक्रमण के ये खतरनाक संकेत जानें
त्वचा पर लालिमा, सूजन और दर्द अचानक बढ़ें या तेजी से फैलें, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। डॉ. सौरभ शाह ने सेल्युलाइटिस और नेक्रोटाइजिंग सॉफ्ट टिश्यू इन्फेक्शन के लक्षण बताए हैं।
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त्वचा पर लालिमा, सूजन और दर्द आम परेशानियां हैं। ज्यादातर बार ये त्वचा की जलन, एलर्जी या सूजन की वजह से होती हैं। लेकिन अगर यही लक्षण अचानक दिखने लगें, तेज हो जाएं या तेजी से फैलने लगें, तो ये त्वचा के संक्रमण की निशानी हो सकते हैं। ऐसे में इन्हें नजरअंदाज करने के बजाय वक्त पर ध्यान देना जरूरी है। जल्दी इलाज मिले तो संक्रमण को गंभीर होने से रोका जा सकता है। इस बारे में सैफी हॉस्पिटल, मुंबई के सलाहकार त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ शाह ने विस्तार से जानकारी दी है।
त्वचा के संक्रमण के आम प्रकारों में से एक है सेल्युलाइटिस (Cellulitis)। यह त्वचा और उसके नीचे के नरम ऊतकों को प्रभावित करने वाला संक्रमण है। इसमें प्रभावित हिस्सा गर्म हो जाता है, उस पर सूजन आती है और छूने पर दर्द होता है। त्वचा की लालिमा धीरे-धीरे बढ़ भी सकती है। कई बार इसके साथ बुखार, ठंड लगना और कंपकंपी जैसे लक्षण भी दिखते हैं। सेल्युलाइटिस के लक्षण दिखें तो फौरन डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इलाज न हो तो यह संक्रमण शरीर के गहरे ऊतकों तक पहुंच सकता है और कुछ मामलों में खून तक भी चला जाता है।
दूसरा, ज्यादा गंभीर प्रकार है नेक्रोटाइजिंग सॉफ्ट टिश्यू इन्फेक्शन (Necrotising Soft Tissue Infection)। यह संक्रमण दुर्लभ है, पर जानलेवा हो सकता है। यह तेजी से फैलता है और शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। इसके लक्षण पहचानना अहम है। सूजन और दर्द का तेजी से बढ़ना, त्वचा पर छाले या फोड़े पड़ना, त्वचा के किसी हिस्से में संवेदना कम हो जाना, या त्वचा का रंग बैंगनी, गहरा या काला पड़ना इसके संभावित लक्षण हैं। कई बार त्वचा पर दिखने वाले बदलाव के मुकाबले दर्द बहुत ज्यादा होता है। ऐसे लक्षण मिलें तो फौरन अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जाना चाहिए। वक्त पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण जान के लिए खतरा बन सकता है।
कुछ लोगों को त्वचा के संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। डायबिटीज के मरीज, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और ऑपरेशन के बाद जिनका घाव भर रहा हो, उन्हें संक्रमण की संभावना ज्यादा हो सकती है। एंटीबायोटिक (Antibiotics) का बार-बार या गलत तरीके से इस्तेमाल करने से भी कुछ संक्रमणों का इलाज मुश्किल हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि ऐसे हर शख्स को संक्रमण होगा ही। मगर त्वचा पर कटे हुए घाव, खरोंच या किसी भी खुले जख्म से बैक्टीरिया शरीर में घुस सकते हैं। इसलिए घाव को साफ रखना और ठीक से ढककर बचाना बेहद जरूरी है।
त्वचा का हर लाल या दर्द वाला हिस्सा संक्रमण की वजह से ही हो, ऐसा नहीं है। एलर्जिक रिएक्शन, कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (संपर्क से होने वाली त्वचा की सूजन) और त्वचा की जलन से जुड़ी दूसरी दिक्कतों में भी ऐसे ही लक्षण दिख सकते हैं। पर इन सबका इलाज अलग-अलग हो सकता है। इसलिए खुद ही बीमारी का अंदाजा लगाने की कोशिश करने से सही इलाज मिलने में देर हो सकती है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ से वक्त पर सलाह लेने पर पता चल जाता है कि त्वचा में बदलाव संक्रमण से हुए हैं या किसी और वजह से। अगर लालिमा तेजी से फैल रही हो, दर्द तेज हो, या त्वचा पर दिखने वाले बदलाव के मुकाबले दर्द सहन से बाहर लगे, और साथ में बुखार, फोड़े, संवेदना में कमी या त्वचा का रंग गहरा पड़ने जैसे लक्षण हों, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। ये गंभीर खतरे के संकेत हो सकते हैं और ऐसे में फौरन डॉक्टरी मदद लेना जरूरी है। खासकर अगर कुछ घंटों में लक्षण और तेज हो रहे हों, तो देर करने से बचना चाहिए।
वक्त पर पहचान और सही इलाज से गंभीर पेचीदगियों से बचा जा सकता है। त्वचा की कुछ छोटी दिक्कतें ठीक देखभाल से अपने आप ठीक हो सकती हैं। लेकिन यह समझना बहुत अहम है कि लालिमा, सूजन और दर्द कब गंभीर समस्या का इशारा देते हैं। सही वक्त पर डॉक्टरी मदद लेने से कुछ मामलों में मरीज की जान भी बच सकती है।
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