तेल कंपनी के डायरेक्टर को झूठे केस में फंसाने की साजिश नाकाम, आगरा का आदित्य गुप्ता गिरफ्तार
तहसील पुलिस ने राजस्थान की एक तेल कंपनी के डायरेक्टर से तीन करोड़ रुपये वसूलने की कथित साजिश का भंडाफोड़ किया है। नागपुर की 19 साल की छात्रा को पांच लाख का लालच दिया गया था।
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नागपुर की तहसील पुलिस ने राजस्थान की एक तेल कंपनी के डायरेक्टर को झूठे केस में फंसाकर उनसे करोड़ों रुपये ऐंठने की कथित साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए नागपुर की एक 19 साल की छात्रा को पांच लाख रुपये का लालच दिया गया था। उसी के जरिए कथित तौर पर फर्जी शिकायत करवाई गई और फिर डायरेक्टर से पूरे तीन करोड़ रुपये की खंडणी मांगने की कोशिश हुई।
इस मामले के कथित मास्टरमाइंड आदित्य सुरेशचंद्र गुप्ता (30, निवासी आगरा) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट के आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस उपायुक्त राहुल मदणे ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
जिस डायरेक्टर को निशाना बनाया गया, वे राजस्थान के रतनगढ़ के रहने वाले इरफान अली सलीम तेली (32) हैं। रतनगढ़ में उनकी तेल कंपनी है। पुलिस के मुताबिक आदित्य ने इरफान को झूठे केस में फंसाकर उनसे बड़ी रकम वसूलने की साजिश रची। इसके लिए नागपुर में पढ़ाई कर रही एक छात्रा को पांच लाख रुपये देने का लालच दिया गया। आदित्य के कहने पर छात्रा ने तहसील पुलिस स्टेशन में इरफान के खिलाफ शिकायत दी। शुरू में छात्रा की शिकायत पर तहसील पुलिस ने इरफान के खिलाफ केस दर्ज भी कर लिया था।
लेकिन आगे की जांच में पूरे मामले ने अलग मोड़ ले लिया। पुलिस ने बताया कि आदित्य ने इरफान के खिलाफ पुणे में भी इसी तरह का केस दर्ज करवाया था। उस केस में इरफान इस वक्त जेल में हैं। तहसील पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मामले की कई शक वाली बातें खुलने लगीं।
अलग से की गई पूछताछ में छात्रा ने कहा कि वह इरफान को जानती ही नहीं है। उसने यह भी बताया कि उसने 'मीका' ऐप पर इरफान से कभी बात नहीं की और शिकायत सिर्फ आदित्य के कहने पर दी थी। उपायुक्त राहुल मदणे ने यह जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने छात्रा के मोबाइल का डेटा खंगाला। पुलिस का दावा है कि इस जांच से साफ हुआ कि आदित्य ने ही इरफान के खिलाफ साजिश रची थी। इसी आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।
छात्रा मूल रूप से चंद्रपुर की है और पिछले तीन साल से नागपुर में किराए के कमरे में रहती है। शहर के एक नामी कॉलेज में उसकी पढ़ाई चल रही है। पुलिस के मुताबिक आदित्य को उसका मोबाइल नंबर एक पार्सल के जरिए मिला। फिर दोनों की जान-पहचान हुई। आरोप है कि इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर आदित्य ने छात्रा को शिकायत दर्ज कराने के लिए उकसाया।
पूछताछ के दौरान पुलिस को आदित्य पर शक कैसे हुआ, यह भी पुलिस ने बताया। पुलिस निरीक्षक संजय मेंढे की देखरेख में हवलदार धनराज चिंगुवार मामले की जांच कर रहे थे। शिकायत में जिस वीडियो सबूत का जिक्र था, उसे जब्त करने के सिलसिले में छात्रा से पूछताछ चल रही थी। उस वक्त उसके साथ आया आदित्य बार-बार बातचीत में दखल दे रहा था। यह देखकर पुलिस ने उसे एक तरफ बिठा दिया और छात्रा से अलग से पूछताछ की। इसी पूछताछ में मामले की अहम बातें सामने आईं।
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त राहुल मदणे और सहायक पुलिस आयुक्त शिवप्रसाद पारवे के मार्गदर्शन में हुई। इसे वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय मेंढे, उपनिरीक्षक संदीप भिताळे और पुलिस हवलदार धनराज चिंग्वार ने अंजाम दिया।
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