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22:50 IST

ताडोबा को विदेशी सैलानियों के नक्शे पर लाने की तैयारी, विश्व बैंक के साथ बनी योजना

महाराष्ट्र सरकार और विश्व बैंक की परियोजना के तहत ताडोबा समेत चार पर्यटन क्षेत्रों का कायाकल्प होगा, विदेशी पर्यटकों की संख्या 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य है।

ताडोबा को विदेशी सैलानियों के नक्शे पर लाने की तैयारी, विश्व बैंक के साथ बनी योजना तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर संभाग के चंद्रपुर में स्थित ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए रूप में पेश किया जाएगा। मध्य भारत की 'टाइगर कैपिटल' के नाम से मशहूर इस रिजर्व को विश्व पर्यटन के नक्शे पर मजबूत पहचान दिलाने की योजना बनी है।

यह काम महाराष्ट्र सरकार और विश्व बैंक के संयुक्त कार्यक्रम 'महाराष्ट्र स्ट्रेंग्दनिंग इंस्टीट्यूशनल कैपेबिलिटीज डिस्ट्रक्ट्स फॉर इनेबलिंग ग्रोथ' के जरिए होगा। इस कार्यक्रम का मकसद जिलों में संस्थागत क्षमता मजबूत करके राज्य में विकास को रफ्तार देना है। ताडोबा के साथ विदर्भ के अमरावती जिले का चिखलदरा, सिंधुदुर्ग और सोलापुर-धाराशिव के पर्यटन क्षेत्र भी इसमें शामिल हैं। परियोजना में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार के पर्यटन निदेशालय ने ताडोबा को केंद्र में रखकर राज्य के चार प्रमुख टूरिज्म सर्किटों का कायाकल्प करने की योजना बनाई है। इनमें ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व और वाइल्डलाइफ सर्किट, चिखलदरा हिल स्टेशन और मेलघाट वाइल्डलाइफ क्षेत्र शामिल हैं। तीसरे सर्किट में विजयदुर्ग किला, सिंधुदुर्ग किला, देवबाग, तारकरली-निवती बीच व हिल स्टेशन हैं, जबकि चौथे में नलदुर्ग किला, पंढरपुर और तुलजापुर के धार्मिक स्थल आते हैं। इन सभी जगहों पर विश्व स्तरीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी और पर्यटन को गति देने के लिए 'डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन' बनाया जाएगा।

विश्व बैंक की परियोजना का एक बड़ा लक्ष्य चुने हुए पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटकों की आवक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करना है। ताडोबा और विदर्भ में यह संख्या 10 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सबसे पहले राज्यव्यापी सर्वे एजेंसी और डीएमओ के जरिए ताडोबा, चिखलदरा और सिंधुदुर्ग जैसे इलाकों में आने वाले विदेशी पर्यटकों का सटीक बेसलाइन डेटा तैयार होगा। पर्यटक कब आते-जाते हैं और कितना ठहरते हैं, यह जानने के लिए पारंपरिक सर्वे के साथ 'मोबाइल पोजिशनिंग डेटा' और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की जाएगी।

विदेशी सैलानियों को खींचने के लिए अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म एक्सपो, ट्रेड फेयर और रोडशो होंगे। सोशल मीडिया सेंटीमेंट एनालिसिस और डिजिटल मार्केटिंग अभियानों से ताडोबा की सफारी की ग्लोबल ब्रांडिंग की जाएगी। डीएमओ की स्थापना और संचालन के लिए 41 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। अगर परियोजना के तहत विदेशी पर्यटकों की संख्या में 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज होती है, तो विश्व बैंक की ओर से 4.1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

डीएमओ किसी पर्यटन स्थल के सर्वांगीण विकास, प्रचार-प्रसार और प्रबंधन के लिए बनी संस्था होती है। यह ताडोबा, सिंधुदुर्ग, चिखलदरा और सोलापुर-धाराशिव में स्थानीय प्रशासन, वन विभाग, पर्यटन विभाग और निजी पर्यटन संचालकों के बीच तालमेल बनाएगी। हर स्थल के लिए अलग डेस्टिनेशन मैनेजमेंट प्लान तैयार करना, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग करना और स्थानीय युवाओं, जिप्सी चालकों व हॉस्पिटैलिटी स्टाफ का कौशल विकास करना इसके मुख्य काम होंगे।

परियोजना में निजी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर है। महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम (एमटीडीसी) की 10 प्रमुख संपत्तियों और रिसॉर्ट्स को निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता से चलाने का फैसला हुआ है, जिनमें ताडोबा सहित ये चारों पर्यटन स्थल भी आते हैं। निजी कंपनियां इन संपत्तियों का बुनियादी ढांचा सुधारेंगी और लग्जरी सुविधाएं व विश्व स्तरीय हॉस्पिटैलिटी सेवाएं देंगी। संपत्तियों का कमर्शियलाइजेशन सफलतापूर्वक पूरा होने पर करीब 20.5 करोड़ का फंड भी दिया जाएगा।

यह परियोजना महाराष्ट्र सरकार और विश्व बैंक का संयुक्त कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य राज्य को वर्ष 2027 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देना है। इसके तहत जिला स्तर पर योजना और क्रियान्वयन की क्षमता मजबूत होगी, डेटा आधारित नीतियां बनेंगी, प्राइवेट कैपिटल आकर्षित किया जाएगा और पर्यटन सेवाएं डिजिटल होंगी।

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