स्वामीस्थान में स्वामी नहीं, तभी पहुंचा नन्हा अवधूत, रणजीत को सीधी चुनौती
कलर्स मराठी की सीरियल 'जय जय स्वामी समर्थ' के आने वाले एपिसोड में आठ-नौ साल के अवधूत की अचानक एंट्री होती है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
स्वामी कहां हैं? और उनकी जगह आया यह छोटा अवधूत कौन सा रहस्य लेकर आया है? 'जय जय स्वामी समर्थ' सीरियल के आने वाले एपिसोड में दर्शकों को ऐसा ही एक अनपेक्षित और रहस्यमय अनुभव मिलने वाला है। स्वामी की लीला अगाध है, उनकी सीख की ताकत असीम है और अपने भक्तों की रक्षा के लिए वे किस रूप में प्रकट होंगे, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
स्वामीस्थान में स्वामी की गैरमौजूदगी के बीच अचानक एक आठ-नौ साल के चुलबुले बच्चे की एंट्री होती है। यही है अवधूत। उम्र भले छोटी हो, पर उसकी बोली, उसका आत्मविश्वास और उसकी बातों से झलकने वाली गजब की समझ दर्शकों को हैरान कर देगी। स्वामी जैसी वाणी, विलक्षण शक्ति और रणजीत को सीधी चुनौती, यह बालक आखिर है कौन?
स्वामीस्थान में कदम रखते ही अवधूत का सामना रणजीत और उसके साथियों से होता है। रणजीत के सिर पर विटी लगने के साथ शुरू हुआ यह मुकाबला धीरे-धीरे और दिलचस्प और उत्कंठा भरा होता जाता है। रणजीत की बदतमीजी से अवधूत जरा भी नहीं डरता। वह उसी की भाषा में, पर अपने भोले और शरारती अंदाज में जवाब देकर उसे अच्छा-खासा परेशान कर देता है। बच्चे के रूप में होने के बावजूद उसकी ताकत, उसका बेखौफ बर्ताव और स्वामी की सीख का सटीक मतलब समझाने का उसका हुनर देखकर रणजीत ही नहीं, उसके साथी भी उलझन में पड़ जाते हैं।
अवधूत अपने बालसुलभ पर चुभते शब्दों में समझाता है कि स्वामी ने जिन शस्त्रों की बात की, उनका मतलब सिर्फ ढाल, तलवार या धनुष-बाण नहीं है। असली शस्त्रों की ताकत मन में और कलाई में होती है। रणजीत को ये बेखौफ जवाब बर्दाश्त नहीं होते। लेकिन अवधूत की चेतावनी सिर्फ शब्दों तक नहीं रहती। रणजीत को अचानक मौत का डर सताने लगता है और उसकी हालत देखकर उसके साथी भी दहल जाते हैं। स्वामीस्थान में आकर स्वामी को ही चुनौती देने चला रणजीत क्या अब अपने विनाश की आहट सुनेगा?
इसी बीच स्वामीस्थान में सुई में धागा पिरोने जैसे साधारण काम से संयम, निरंतरता और तपस्या का मतलब खुलता है। ब्रह्मचारिणी देवी के दिव्य दर्शन से चारों स्त्रियों को अपने भीतर की शक्ति का एहसास होता है। स्वामी की दी हुई सीख ही उनके लिए एक असरदार शस्त्र बन जाती है। स्त्रियों को सिर्फ सहने की नहीं, बल्कि अपनी ताकत पहचानकर अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा मिलती है।
पर रणजीत का बदला शांत नहीं हुआ है। स्वामीस्थान को जला देने की साजिश रचने वाले रणजीत के सामने अवधूत फिर आकर खड़ा हो जाता है। क्या रणजीत की बनाई योजना कामयाब हो पाएगी? स्वामी की गैरमौजूदगी में उनके विचारों और सामर्थ्य का एहसास कराने वाला अवधूत आखिर कौन है? क्या वह स्वामी का कोई संकेत है, उनका दूत है, या इस सबके पीछे कोई और दैवी रहस्य छिपा है? स्वामी कहां हैं?
इन सवालों के जवाब खोजते हुए दर्शकों को भक्ति, दैवी शक्ति, स्त्री-सामर्थ्य और अधर्म के खिलाफ संघर्ष का एक नया अध्याय देखने को मिलेगा। अवधूत की शरारत के पीछे छिपा रहस्य और स्वामी की हर लीला का मतलब जानने के लिए सीरियल का अगला एपिसोड जरूर देखें। 'जय जय स्वामी समर्थ - जागर शक्तीचा, महिमा स्वामींचा' रोज रात 8.10 बजे कलर्स मराठी पर आता है और कभी भी, कहीं भी JioHotstar पर देखा जा सकता है।
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