मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:54 IST

डॉक्टर से मारपीट मामले में रमेश म्हात्रे समेत चार की जमानत रद्द, आधारवाडी जेल भेजे गए

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द की थी। कल्याण कोर्ट में पेश होते ही रमेश म्हात्रे और तीन साथियों को न्यायिक हिरासत में आधारवाडी जेल भेज दिया गया।

डॉक्टर से मारपीट मामले में रमेश म्हात्रे समेत चार की जमानत रद्द, आधारवाडी जेल भेजे गए
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

डॉक्टर से मारपीट के मामले में नगरसेवक रमेश म्हात्रे समेत चार लोगों की जमानत रद्द कर दी गई है। कोर्ट में हाजिर होते ही चारों को कल्याण की आधारवाडी जेल भेज दिया गया।

मामला 6 जुलाई 2026 का है। डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में, जो केडीएमसी चलाती है, एक महिला डिलीवरी के लिए आई थी। उसके इलाज को लेकर विवाद हो गया था। इसी विवाद में एक डॉक्टर और एक नर्स के साथ मारपीट की गई थी।

रमेश म्हात्रे कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में नगरसेवक हैं। वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नगरसेवक हैं। शास्त्रीनगर अस्पताल में महिला डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ से मारपीट के मामले में वे चर्चा में आए। बताया जाता है कि उनकी पढ़ाई 11वीं तक हुई है।

पुलिस ने इस मामले में 1,832 पन्नों की चार्जशीट दाखल की थी। सरेंडर करने के बाद कल्याण कोर्ट के जज संतोष आगे ने रमेश म्हात्रे और उनके 3 साथियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद चारों को कल्याण की आधारवाडी जेल पहुंचा दिया।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाई कोर्ट से रमेश म्हात्रे को मिली जमानत रद्द की थी। कोर्ट ने कहा था, "डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर होने वाले हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।" कोर्ट ने उन्हें 5 अक्टूबर से पहले सरेंडर करने का आदेश दिया था।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दिया। बताया गया है कि नगरसेवक रमेश म्हात्रे पर पहले से 19 मामले दर्ज हैं। बेंच ने इसे गंभीर माना। हाई कोर्ट और निचली अदालत की दी हुई जमानत को गलत ठहराया गया और रमेश म्हात्रे व उनके साथियों की जमानत खारिज कर दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, "मेडिकल क्षेत्र और डॉक्टरों पर इस तरह हमले नहीं किए जा सकते। अगर आरोपी जमानत पर बाहर रहा तो मुकदमे पर उसका बुरा असर पड़ सकता है।"

जमानत रद्द करने की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के समय-सीमा वाले निर्देश पर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की। उसने मुकदमे को तेजी से चलाने की गुंजाइश भी रखी।

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