जंतरमंतर मार्च पर निकले वकील सुप्रीम कोर्ट के बाहर पुलिस हिरासत में, बार एसोसिएशन ने CJI को लिखा पत्र
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में शनिवार को वकील भी उतरे। आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
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नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ दिल्ली में चल रहे आंदोलन को अब वकीलों का भी समर्थन मिल रहा है। शनिवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर से जंतरमंतर की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकालने वाले वरिष्ठ और महिला वकीलों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, ऐसा आरोप लगाया गया है।
इस कार्रवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ी नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर दखल देने की मांग की है। संगठन ने पत्र में कहा है कि वकीलों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई इस कार्रवाई पर मुख्य न्यायाधीश हस्तक्षेप करें। बार एसोसिएशन ने घटना को गंभीरता से लेने की मांग भी की है।
मिली जानकारी के मुताबिक, काले कोट पहने वकील सुप्रीम कोर्ट के गेट नंबर 'सी' और भगवान दास रोड इलाके से जंतरमंतर की तरफ निकले थे। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें लगभग 100 यार्ड पर ही रोक दिया। मार्च में कई वरिष्ठ और महिला वकील शामिल थे। आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग करके प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
उधर, गोल मार्केट के ए. के. गोपालन भवन से जंतरमंतर की ओर मार्च निकालने वाले स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के 400 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेने की खबर है। संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि उन्हें पुलिस की बसों में बिठाकर दूसरी जगह ले जाया गया।
SFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी के मुताबिक, सुबह 10 बजे मार्च शुरू होते ही पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। पूरे इलाके में पुलिस का बंदोबस्त बढ़ा दिया गया था।
पुलिस की बस के अंदर भी छात्रों ने नारेबाजी जारी रखी। एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा के लिए है और जब तक ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के मुद्दों पर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और चुनाव तंत्र पर सवाल उठाए हैं।
इस आंदोलन के सिलसिले में इससे पहले भी कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। दावा किया गया है कि CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतारकर हिरासत में लिया गया। यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम से और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को चंडीगढ़ से हिरासत में लिए जाने की भी खबर है।
वकीलों, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के जुड़ने से दिल्ली का यह आंदोलन व्यापक रूप लेता दिख रहा है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर कानूनी और राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा होने की संभावना है। अब सबकी नजर इस पर है कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पत्र पर मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय की ओर से क्या रुख लिया जाता है और आंदोलन में आगे क्या होता है।