सूखे के बीच 180 किसान जाएंगे विदेश दौरे पर, कृषि विभाग ने मंज़ूर किए 4 करोड़ रुपये
महाराष्ट्र के कृषि विभाग ने 180 किसानों को अध्ययन दौरे पर विदेश भेजने का फैसला किया है। इस पर 4 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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महाराष्ट्र में इस वक्त सूखे के हालात हैं। इसी बीच कृषि विभाग और कृषिमंत्री दत्तात्रय बरणे ने किसानों को अध्ययन दौरे पर विदेश भेजने का बड़ा फैसला लिया है। इस दौरे के लिए 180 किसानों को चुना जाएगा और इस पर कुल 4 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
दौरे में किसान आधुनिक तकनीक, खेती की उपज का निर्यात, बिक्री और प्रोसेसिंग के बारे में सीखेंगे। कृषि विभाग की तरफ से इस दौरे को प्रशासकीय मंज़ूरी मिल चुकी है। राज्य सरकार ने भी इसके लिए 4 करोड़ रुपये के फंड को हरी झंडी दे दी है।
चुनाव का तरीका यह रहेगा कि राज्य के 34 जिलों से हर जिले के 5 किसान लिए जाएंगे। इस तरह कुल 170 किसान जिलों से चुने जाएंगे। बाकी 10 किसानों को राज्यस्तरीय समिति चुनेगी। यानी कुल मिलाकर 180 किसान इस दौरे पर जाएंगे।
विदेश में किसानों को सही मार्गदर्शन मिल सके और वे तकनीकी बातें ठीक से समझ सकें, इसके लिए कृषि विभाग के 9 अधिकारी भी उनके साथ रहेंगे।
इस अध्ययन दौरे का मुख्य मकसद किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की चीज़ें देखने और सीखने का मौका देना है। इसमें यह समझाया जाएगा कि खेती में काम आने वाली आधुनिक कृषि तकनीक कैसे चलती है, खेती में क्या बदलाव हो रहे हैं और आगे तकनीकी पढ़ाई-सीख की तरफ कैसे बढ़ा जा रहा है। खेती के लिए बनने वाले बाज़ार, किसानों के माल को मिलने वाला गारंटी भाव और उपज का निर्यात कैसे होता है, यह सब भी दौरे में सिखाया जाएगा। इसके अलावा उपज की बिक्री, स्टोरेज का मैनेजमेंट और फूड प्रोसेसिंग उद्योग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
सूखे के बीच हो रहे इस विदेश दौरे के फैसले पर विपक्ष की तरफ से कुछ हद तक आलोचना हो रही है। विपक्ष का कहना है कि यह खर्च अनावश्यक है।
दूसरी तरफ राज्य सरकार ने सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए फौरी सहारे के तौर पर दिवाली से पहले 5 हज़ार रुपये की आर्थिक मदद सीधे बैंक खाते में जमा करने का फैसला भी लिया है।
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