सूखा पीड़ितों के लिए केडीएमसी के बीजेपी पार्षदों का एक महीने का वेतन, म्हात्रे का एक लाख
कल्याण-डोंबिवली के बीजेपी पार्षदों ने मुख्यमंत्री सहायता निधि के लिए एक महीने का वेतन देने का फैसला किया है।
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महाराष्ट्र के सूखा पीड़ित लोगों की मदद के लिए कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने पहल की है। बीजेपी के सभी पार्षदों ने तय किया है कि वे अपना एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री सहायता निधि के लिए देंगे। इस पहल के जरिए कल्याण-डोंबिवली बीजेपी परिवार ने सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया है।
सभी पार्षदों के वेतन का एकसाथ बना चेक बीजेपी कल्याण जिलाध्यक्ष नंदू परब ने मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष को सौंपा। इस पहल का मुख्य मकसद यह है कि सूखे की वजह से मुश्किल में आए लोगों को मदद मिले और संकट के समय उन्हें सहारा दिया जा सके।
इस मदद में बीजेपी ठाणे विभाग के प्रचार प्रमुख और पार्षद दिपेश म्हात्रे ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने सूखा पीड़ितों की मदद के लिए एक लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक मदद दी। पार्षदों के एक महीने के वेतन के अलावा म्हात्रे ने यह रकम अलग से दी है, जिससे सूखा पीड़ितों के लिए जुटाए जा रहे मदद कोष में और इजाफा हुआ है।
महाराष्ट्र पर जब भी प्राकृतिक आपदा या कोई और संकट आता है, समाज के अलग-अलग तबके साथ आकर जरूरतमंदों की मदद करते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कल्याण-डोंबिवली के बीजेपी पार्षदों ने सूखा पीड़ितों के लिए योगदान देने का फैसला किया है। सूखे की वजह से कई लोगों के सामने तरह-तरह की दिक्कतें खड़ी हो गई हैं, और आर्थिक मदद के जरिए संकट में फंसे लोगों को सहारा देने की कोशिश इस पहल में की गई है।
इस पहल से यह संदेश दिया गया है कि सूखा पीड़ितों की मदद करना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, समाज के हर तबके को अपनी क्षमता के हिसाब से योगदान देना जरूरी है। सामाजिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और संकट में फंसे लोगों के साथ खड़े होने की भावना से यह फैसला लिया गया है। जनप्रतिनिधियों का अपने वेतन से मदद करने का फैसला दूसरों को भी ऐसी पहल में शामिल होने की प्रेरणा दे सकता है।
पार्षदों का एक महीने का वेतन और दिपेश म्हात्रे का एक लाख रुपये का अतिरिक्त योगदान, इन दोनों के जरिए मुख्यमंत्री सहायता निधि के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है। इस पहल के पीछे भावना यही है कि सूखे से परेशान लोगों को राहत मिले और समाज के ज्यादा से ज्यादा लोग और संस्थाएं मदद के लिए आगे आएं।