सोमेश्वर कारखाने में राजवर्धन शिंदे चेयरमैन और संग्राम सोरटे वाइस चेयरमैन, दोनों निर्विरोध चुने गए
श्री सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने के अध्यक्ष पद पर राजवर्धन शिंदे और उपाध्यक्ष पद पर संग्राम सोरटे बिना मुकाबले चुने गए।
राज्य के अग्रणी कारखानों में गिने जाने वाले श्री सोमेश्वर सहकारी शक्कर कारखाने को नया नेतृत्व मिल गया है। अध्यक्ष पद पर राजवर्धन शिंदे और उपाध्यक्ष पद पर संग्राम सोरटे निर्विरोध चुने गए। शिंदे का अध्यक्ष बनना उम्मीद के मुताबिक ही था। सोरटे संचालक के तौर पर अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
चुनाव के लिए कारखाने के राजमाता जिजाऊ सभागार में संचालक मंडल की विशेष बैठक बुलाई गई थी। इसी बैठक में दोनों पदों का फैसला हुआ। अध्यक्ष पद के लिए कुछ वरिष्ठ संचालकों के साथ कई नौजवान चेहरों के नाम भी चर्चा में थे। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और सांसद पार्थ पवार ने शिंदे के पहले के अध्यक्ष पद के अनुभव को देखते हुए उन्हें मौका दिया। शिंदे वाल्हे गुट से बड़े अंतर से जीतकर आए थे।
राष्ट्रवादी के युवा नेता जय पवार की मौजूदगी में यह चुनाव हुआ। राष्ट्रवादी कांग्रेस के पुणे जिलाध्यक्ष संभाजी होळकर, राजेंद्र कोरेकर और तहसील अध्यक्ष संदीप बांदल ने अध्यक्ष पद के लिए राजवर्धन शिंदे का नाम दिया, जिनकी सिफारिश सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार ने की थी। उपाध्यक्ष पद के लिए संग्राम सोरटे का नाम रखा गया। निर्वाचन निर्णय अधिकारी दिग्विजय आहेर और सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारी प्रमोद दुरगुडे ने देखा कि दोनों पदों के लिए एक ही नाम आया है, इसलिए शिंदे और सोरटे के निर्विरोध चुने जाने का ऐलान कर दिया।
राजवर्धन शिंदे बारामती तहसील के मुरूम गांव के रहने वाले हैं। वे पहले बारामती तहसील सहकारी दूध उत्पादक संघ के उपाध्यक्ष और फिर अध्यक्ष रह चुके हैं। 2005 से 2007 तक वे कारखाने के निर्विरोध अध्यक्ष थे और 2010 से 2013 के बीच भी उन्होंने यही कुर्सी संभाली। 2021 से 2026 तक वे संचालक रहे। बारामती तहसील राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया था। इसी लंबे अनुभव के दम पर उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली।
चुने जाने के बाद शिंदे ने कहा, "दिवंगत अजितदादा की वजह से मुझे सहकारी क्षेत्र में काम करने का मौका मिला। उनके काम करने का तरीका देखकर मैं सीख पाया। दादा के बाद उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़ा रह पाया, इसकी मुझे खुशी है। आने वाले समय में सोमेश्वर के रिकॉर्ड भाव की परंपरा हम कायम रखेंगे। अभी सूखे के हालात हैं, लेकिन ऐसे हालात में काम करने का मुझे अनुभव है। इसलिए संचालक मंडल, अधिकारी, मजदूर और सदस्यों के सहयोग से यह सीजन कामयाबी से पूरा करेंगे।"
उपाध्यक्ष संग्राम सोरटे ओबीसी वर्ग से आते हैं। वे ब वर्ग संस्था प्रतिनिधि गुट से लगातार दूसरी बार बड़े अंतर से चुनकर आए हैं। नवनाथ उद्योग समूह के जरिए उन्हें सहकारी और खेती के क्षेत्र का बड़ा अनुभव है। उन्होंने कई सहकारी संस्थाएं, ऋण सहकारी संस्थाएं और दूध उत्पादक संस्थाएं कामयाबी से चलाई हैं। उन्हें अजित पवार का निष्ठावान कार्यकर्ता माना जाता है। उन्हें उपाध्यक्ष बनाकर सुनेत्रा पवार ने सामाजिक समीकरण साधा है, और चर्चा है कि इससे ओबीसी समाज को न्याय मिला है।
चुनाव के बाद सोरटे ने कहा कि इस मौके पर स्वर्गीय अजित दादा की याद आए बिना नहीं रहती। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कारखाने का कामकाज पारदर्शी और किफायत से चलाया जाएगा और हितों के लिए चौबीस घंटे काम करने की हमारी तैयारी है।
एक दिलचस्प बात यह भी है कि शिंदे और सोरटे पिछले संचालक मंडल में भी थे। राजमाता जिजाऊ सभागार में होने वाली बैठकों में दोनों हमेशा एक-दूसरे के बगल में बैठते थे। अब वही दो पड़ोसी संचालक कारखाने के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बन गए हैं, और इसे लोग संयोग बता रहे हैं।
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