सीमा पर तनाव: चीन बोला, भारत भी आपसी समझौतों का सम्मान करे
चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन सीमा के तनाव पर अपनी बात रखी है। प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को कहा कि कूटनीतिक रास्ता हमेशा खुला रहेगा।
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भारत-चीन सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर अब चीन के विदेश मंत्रालय ने अपनी बात रखी है। मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार, 26 अक्टूबर को कहा कि उनकी सेना सामान्य सीमा गश्त करती है। उनके मुताबिक चीन सभी नियमों का पालन करता है और भारत से भी यही उम्मीद रखता है।
गुओ जियाकुन ने यह भी कहा कि भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहेगा। चीन को उम्मीद है कि भारत भी आपसी समझौतों का सम्मान करेगा और शांति बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाएगा। सीमा वाले इलाकों में इस पर खास ध्यान दिया जाएगा।
चीन की तरफ से कहा गया कि जब चीनी सेना तय गश्त के रास्तों से भटकती है, तब ऐसी घटनाएं होती हैं और उससे अशांति पैदा होती है। चीन और भारत कूटनीतिक और सैन्य रास्तों से एक-दूसरे के संपर्क में हैं। दोनों पक्षों के बीच जो सहमति बनी है, उसे लागू करने और सीमा इलाकों में शांति व स्थिरता रखने के लिए ठोस कदम उठाने की बात भी कही गई।
इस मामले में भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयस्वाल ने कहा कि जैसा पहले बताया जा चुका है, जब चीनी सेना तय गश्त के रास्तों से भटकती है, तब भारत-चीन सीमा इलाकों में हालात समय-समय पर बिगड़ते हैं। उन्होंने बताया कि सीमा प्रबंधन सुधारने के लिए कुछ खास इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर आपसी समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी दोनों पक्ष राजी हो गए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने पिछले हफ्ते एक कार्यक्रम में बात की। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव की जानकारी दी थी। उनका कहना था कि पिछले चार महीनों से लगातार टकराव चल रहा है और भारतीय सेना की तरफ से उन्हें करारा जवाब दिया जा रहा है। इसके बाद से पूरे देश में इस पर चर्चा हो रही है।
शत्रुजीत कपूर के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश में LAC पर कुछ खास जगहों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हाल ही में झड़पें हुई थीं, जो अब भी जारी हैं। उन्होंने कहा कि LAC पर तैनात उनके दल के 'शौर्य' कमांडोज ने हालात संभालने में 'शानदार काम' किया है।
कपूर ने यह भी बताया कि भारत अपनी ड्रोन और ड्रोन-रोधी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है, क्योंकि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का सामना करने के लिए 'पारंपरिक' सैन्य संसाधन और ढांचा काफी नहीं पड़ रहा। उनके मुताबिक PLA ने अपनी क्षमताओं में काफी सुधार और आधुनिकीकरण किया है, जिससे चीन एक 'बेहद ताकतवर प्रतिद्वंद्वी' बन गया है।
आईटीबीपी ने अपनी सभी सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून शामिल कर ली हैं। गृह मंत्रालय ने दल के आधुनिकीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये दिए हैं, जिनमें से 70% रकम खास तौर पर ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए रखी गई है। साथ ही यह दल पहाड़ी लड़ाई, नई पीढ़ी के हथियारों और निहत्थे लड़ाई की ट्रेनिंग पाए 'शौर्य' कमांडोज की और टुकड़ियां भी तैयार कर रहा है।
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