हिमालय के हिम तेंदुओं को बचाने के लिए रॉयल एनफील्ड देगी 3 करोड़ रुपये से ज्यादा
रॉयल एनफील्ड ने हिमालय के दुर्लभ हिम तेंदुओं के संरक्षण के लिए 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड देने का ऐलान किया है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बाइक चलाने के साथ-साथ प्रकृति को बचाने की जिम्मेदारी भी निभाई जा सकती है, यह रॉयल एनफील्ड ने करके दिखाया है। कंपनी ने ऐलान किया है कि वह हिमालय के दुर्लभ हिम तेंदुओं की हिफाजत के लिए 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड देगी। कंपनी के 125वें सालगिरह के साल में यह पहल खास मानी जा रही है।
इस फंड से वन्यजीवों पर रिसर्च होगी, हिम तेंदुओं की गिनती का अध्ययन किया जाएगा और वहां रहने वाले स्थानीय समुदायों को साथ लेकर संरक्षण का काम होगा।
यह काम हिम तेंदुओं के रहने की जगह के 10,500 वर्ग किमी से ज्यादा इलाके में फैलेगा। हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर, यानी 6 इलाकों में संरक्षण का काम किया जाएगा। हिम तेंदुआ ऊंचे पहाड़ी इलाकों में मिलने वाला दुर्लभ वन्यजीव है। उसके बचे रहने के लिए सही रहने की जगह और कुदरती फूड चेन को कायम रखना जरूरी है।
प्रोजेक्ट में वैज्ञानिक रिसर्च, जानवरों की संख्या का आकलन और इंसान व वन्यजीवों के टकराव को कम करने पर जोर रहेगा। हिम तेंदुओं के रहने की जगह के आसपास बसे लोगों को संरक्षण के काम में शामिल करने की कोशिश भी कंपनी कर रही है।
20 सितंबर 2026 को हुई 'वन राइड 2026' में 67 देशों के 1,56,085 राइडर्स शामिल हुए। 'एव्हरी राइडर. एव्हरी रोड. वन मिशन' की थीम पर हुई इस राइड को इस बार हिमालय के प्रकृति संरक्षण से जोड़ा गया।
इस काम के लिए रॉयल एनफील्ड, रॉयल एनफील्ड नेचर कन्झर्वेशन फाउंडेशन, अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी अँड द एन्व्हायर्नमेंट, स्नो लेपर्ड कन्झर्व्हन्सी इंडिया ट्रस्ट और सेंटर फॉर पॅस्टोरलिझम जैसी संस्थाओं के साथ काम करेगी। ये संस्थाएं रिसर्च, स्थानीय भागीदारी और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में मदद करेंगी।
दिसंबर 2026 में 'जर्नींग अक्रॉस द हिमालयाज' कार्यक्रम के दौरान हिम तेंदुआ संरक्षण परिषद करने की योजना है। इसमें भारत की संरक्षण नीतियों, अंतरराष्ट्रीय मानकों और देशों की सरहदों के पार सहयोग पर चर्चा होगी।
लद्दाख के सास्पोत्से में बनने वाला लद्दाख नेचर सेंटर भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसका मकसद स्थानीय लोगों और टूरिस्टों को हिमालय की जैव विविधता और वन्यजीवों की जानकारी देना है। कुल मिलाकर रॉयल एनफील्ड की यह पहल सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है। यह वैज्ञानिक रिसर्च और स्थानीय लोगों की भागीदारी से हिमालय के वन्यजीवों को बचाने की कोशिश है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।