शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर को, शाम 6:19 से रात 8:56 तक पूजा का समय
अश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर शुक्रवार को पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर को रखा जाएगा। पूजा का मुहूर्त शाम 6:19 से रात 8:56 तक है।
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भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए प्रदोष व्रत को बहुत अहम माना जाता है। यह व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है। एक बार कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि पर और दूसरी बार शुक्ल पक्ष की तेरहवीं तिथि पर। प्रदोष व्रत का नाम और उसका धार्मिक महत्व इस बात से तय होता है कि वह हफ्ते के किस दिन पड़ रहा है। जो प्रदोष व्रत शुक्रवार को आता है, उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने से शादीशुदा जिंदगी में सुख और शांति आती है और घर-परिवार में समृद्धि बनी रहती है।
पंचांग के अनुसार अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह 5:05 बजे शुरू होगी। यह तिथि 24 अक्टूबर को सुबह 4:06 बजे खत्म होगी। प्रदोष व्रत में शाम के वक्त भगवान शिव की पूजा का खास महत्व है। इस बार प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को पड़ रही है, इसलिए शुक्र प्रदोष व्रत शुक्रवार, 23 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।
प्रदोष काल में शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है और देवी पार्वती के साथ उनकी पूजा होती है। शुक्र प्रदोष व्रत में पूजा के लिए बताया गया समय शाम 6:19 बजे से रात 8:56 बजे तक है।
पूजा का तरीका यह है कि सुबह जल्दी उठकर नहाएं और साफ कपड़े पहनें। फिर भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। अपनी श्रद्धा और सेहत के हिसाब से फल खाएं या उपवास रखें। शाम को भगवान शिव का पानी और गंगाजल से अभिषेक करें। शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएं, जो दूध, दही, घी, शहद और चीनी को मिलाकर बनता है।
भगवान शिव को चंदन का लेप, बेलपत्र और सफेद फूल चढ़ाएं। खीर या सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं। शिव जी के सामने दीया जलाएं और प्रदोष व्रत की कथा सुनाएं। आखिर में शिव जी की आरती करें और परिवार की शांति और भलाई के लिए प्रार्थना करें।
शादीशुदा जिंदगी में खुशहाली के लिए भी कुछ उपाय बताए गए हैं। धार्मिक मान्यता है कि शुक्र प्रदोष व्रत के दिन शिव और पार्वती की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख और शांति मिलती है। अगर शादीशुदा जिंदगी में तनाव है या कोई परेशानी चल रही है, तो इस दिन देवी पार्वती और भगवान शिव को मखाने की खीर चढ़ा सकते हैं। इसके बाद 'ओम गौरी शंकराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। माना जाता है कि इस पूजा से पति-पत्नी के बीच प्यार, भरोसा और तालमेल बढ़ता है।
पैसों की तंगी से राहत के लिए भी इस दिन शिव की पूजा की जाती है। इसके लिए तांबे या पीतल के बर्तन में पानी, थोड़ा गंगाजल और कच्चा दूध मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। ऐसा करते समय 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार शिव की पूजा से मन को शांति मिलती है और मुश्किल हालात में धीरज रखने की प्रेरणा मिलती है।
धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों की ये जानकारियां सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार की सलाह लेना जरूरी है।
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