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00:32 IST

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक

रविवार, 11 अक्टूबर को पहले दिन कलश स्थापना से देवी की पूजा शुरू होगी। पंचांग के मुताबिक शुभ मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त की वेला, साहित्य की सूची और विधि यहां दी गई है।

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से, घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

शारदीय नवरात्रि इस साल रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है। हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में गिने जाने वाले इस नौ दिन के उत्सव में देवी दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा की शुरुआत पहले दिन कलश स्थापना से होती है, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है।

पंचांग के मुताबिक 11 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक है। किसी वजह से इस वक्त में कलश स्थापना न हो सके, तो अभिजीत मुहूर्त का सहारा लिया जा सकता है। यह सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। शास्त्र के अनुसार नवरात्रि की प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना का खास महत्व है, इसलिए भक्तों को शुभ मुहूर्त में ही स्थापना करने की कोशिश करनी चाहिए।

स्थापना की विधि यह है। सबसे पहले पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद चौकी या व्यासपीठ पर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर देवी दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर रखें। मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं और उसके ऊपर कलश रखें। कलश को साफ पानी से भरें और उसमें चावल के साबुत दाने, सुपारी और एक सिक्का डालें। फिर कलश के मुंह को आम या अशोक के पत्तों से सजाएं और ऊपर एक नारियल रखें। इसके बाद देवी दुर्गा का ध्यान करें, पूजा का संकल्प लें और विधि शुरू करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश को सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

सामग्री की सूची इस तरह है: मिट्टी का बर्तन या तांबे या पीतल का बर्तन, साफ पानी, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, मौली या कलावा, रोली और अक्षत, सुपारी, सिक्का, फूल और हार, धूप और दीया, कपूर, लाल या पीला कपड़ा, मिट्टी और जौ। इनके साथ पूजा की थाली, फल और प्रसाद भी चाहिए होगा। स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा है। इसके लिए साफ जमीन में जौ बोकर नौ दिन तक पानी दिया जाता है।

कई घरों में नवरात्रि के नौ दिन अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है। जो लोग अखंड ज्योति जलाएं, वे दीया ऐसी जगह रखें जहां वह टिका रहे और जलने वाली चीजों से दूर हो। आग न लगे, इसके लिए दीये को छोटे बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखना जरूरी है। ज्योति पर लगातार नजर भी रखनी चाहिए।

घटस्थापना के बाद लगातार नौ दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और संकल्प के हिसाब से दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, दुर्गा चालीसा या देवी के दूसरे स्तोत्रों का पाठ कर सकते हैं। नवरात्रि के दौरान पूजा की जगह की सफाई, नियमित पूजा और अच्छे आचरण पर खास ध्यान देना चाहिए। मान्यता है कि देवी की भक्ति और नियमित पूजा से घर में आनंद, शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों की यह जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इससे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार की सलाह लेना जरूरी है।

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