सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 09:26 IST

शरद की पूनम पर लक्ष्मी की पूजा, वलित ब्राह्मण की कथा और मंत्र

कोजागिरी पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। जानिए वलित ब्राह्मण की व्रतकथा, पूजा की विधि और जपने के मंत्र।

शरद की पूनम पर लक्ष्मी की पूजा, वलित ब्राह्मण की कथा और मंत्र तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

हिंदू धर्म में अश्विन महीने की पूर्णिमा को खास धार्मिक और आध्यात्मिक अहमियत दी गई है। इसी पूर्णिमा को कोजागिरी पूर्णिमा कहते हैं। बारिश का मौसम खत्म होकर शरद ऋतु शुरू होती है, तब आसमान में पूरा चांद अपनी ठंडी चांदनी बिखेरता है। चांदनी में नहाई यह रात मन को सुकून और ताजगी देने वाली मानी जाती है।

मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी धरती पर घूमकर देखती हैं कि कौन जाग रहा है। 'को जागर्ति?' यानी 'कौन जाग रहा है?' इन्हीं शब्दों से इस पूर्णिमा का नाम 'कोजागिरी' पड़ा, ऐसा बताया जाता है।

इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा, रात का जागरण, मंत्रों का जप और चांद के दर्शन की परंपरा है। कुछ जगहों पर लक्ष्मी-कुबेर की पूजा होती है। कुछ जगहों पर चांद को दूध चढ़ाया जाता है और प्रसाद के तौर पर मसाला दूध पिया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस रात सच्चे मन से देवी को याद करने पर घर में सुख, शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य बना रहता है।

व्रतकथा के मुताबिक पुराने जमाने में मगध देश में वलित नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह संस्कारी, धार्मिक और अच्छे आचरण वाला था, लेकिन बहुत गरीब था। गरीबी की वजह से उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उसकी पत्नी हालात को लेकर उसे हर वक्त ताने मारती और उसका अपमान करती थी। इससे वलित मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गया था।

एक दिन पत्नी के बर्ताव से तंग आकर उसने घर छोड़ दिया और जंगल की तरफ चला गया। जंगल में भटकते हुए आश्विन पूर्णिमा की रात आ गई। उस वक्त कुछ नागकन्याएं कोजागिरी का व्रत कर रही थीं। उन्होंने वलित को पूजा में शामिल कर लिया और रात भर जागने को कहा।

वलित ने पूरे मन से माता लक्ष्मी की पूजा की और देवी को याद करते हुए रात जागकर बिताई। उसकी भक्ति से खुश होकर माता लक्ष्मी ने उस पर कृपा की और उसकी गरीबी दूर हो गई। व्रतकथा में बताया गया है कि उसे धन-धान्य और ऐश्वर्य मिला। कुछ समय बाद वह घर लौटा। उसकी बदली हालत देखकर पत्नी का बर्ताव भी बदल गया और दोनों की जिंदगी में सुख-चैन आ गया।

इस कथा से श्रद्धा, भक्ति, संयम और अच्छे आचरण की अहमियत सामने आती है। कोजागिरी का व्रत सिर्फ पैसे पाने के लिए नहीं है। यह मन की नकारात्मकता को दूर कर अच्छे विचारों से जिंदगी को समृद्ध बनाने की प्रेरणा देता है।

हिंदू परंपरा में माता लक्ष्मी को धन, अनाज, समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। कोजागिरी की रात लक्ष्मी पूजन से घर में मंगलमय माहौल बनता है। पूजन करते वक्त सिर्फ धन नहीं मांगना चाहिए, बल्कि सद्बुद्धि, संतोष और धर्म के आचरण की भी प्रार्थना करनी चाहिए।

पूजा घर पर सादे तरीके से भी की जा सकती है। पूजा का तरीका परिवार की परंपरा और इलाके के रिवाज के हिसाब से बदल सकता है। कुबेर को हिंदू परंपरा में धन का स्वामी माना जाता है, इसलिए कुछ परिवारों में इस रात लक्ष्मी के साथ कुबेर की भी पूजा होती है। प्रार्थना यह की जाती है कि पैसे, कारोबार और लेन-देन में ईमानदारी बनी रहे, दौलत का सही इस्तेमाल हो और परिवार में संतोष रहे।

माता लक्ष्मी को फल, खीर, दूध, मिठाई या अपनी परंपरा के मुताबिक बना भोग चढ़ाना चाहिए। फिर लक्ष्मी माता की आरती करें। परिवार के सब लोग साथ बैठकर देवी को याद करें और वलित ब्राह्मण की व्रतकथा या प्रचलित कोजागिरी व्रतकथा पढ़ें।

इस रात चांद के दर्शन का खास महत्त्व है। चांद दिखने पर दर्शन करें और अपनी परंपरा के अनुसार अर्घ्य दें। कुछ जगहों पर दूध, मसाला दूध या खीर को चांदनी में रखने का रिवाज है, फिर उसे प्रसाद के रूप में लिया जाता है। रात के जागरण में लक्ष्मी माता का नामस्मरण, मंत्र जप, स्तोत्र पाठ, भजन और धार्मिक कथाएं पढ़ी जा सकती हैं।

महालक्ष्मी मंत्र है: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ यह माता लक्ष्मी को वंदन करने वाला प्रचलित मंत्र है। पूजा के वक्त शांति और एकाग्रता से इसका जप करना चाहिए।

लक्ष्मी बीजमंत्र है: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ यह लक्ष्मी की उपासना में प्रचलित मंत्र है और अपनी श्रद्धा के अनुसार इसका जप किया जा सकता है।

लक्ष्मी गायत्री मंत्र: ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे। विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥ इस मंत्र से महालक्ष्मी का ध्यान कर सद्बुद्धि और सही रास्ते से तरक्की की प्रेरणा मांगी जाती है।

लक्ष्मी प्रार्थना: नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥ इसमें महालक्ष्मी को नमन कर उनकी कृपा मांगी जाती है।

कुबेर मंत्र: ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ इस मंत्र से धन-धान्य और समृद्धि के लिए कुबेर से प्रार्थना की जाती है। कुबेर पूजन करते वक्त संकल्प लेना चाहिए कि दौलत सिर्फ अपने सुख के लिए नहीं, बल्कि परिवार की भलाई, जरूरतमंदों की मदद और समाज के काम के लिए भी इस्तेमाल होगी।

धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों की जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार की सलाह लेना जरूरी है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे