शादी के बाद पूजा बिरारी की पहली दिवाली, 30 नवंबर से शुरू होगा नया सीरियल
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अभिनेत्री पूजा बिरारी सोहम बांदेकर से शादी के बाद पहली दिवाली मना रही हैं। नए सीरियल की शूटिंग के बीच उन्होंने बचपन की दिवाली और घर की परंपरा के बारे में बताया।
'स्वाभिमान' और 'येड लागलं प्रेमाचं' जैसे सीरियलों से घर-घर पहचानी जाने वाली अभिनेत्री पूजा बिरारी के लिए इस बार की दिवाली खास है। सोहम बांदेकर से शादी के बाद यह उनकी पहली दिवाली है। एक तरफ नए घर में त्योहार की रौनक है, दूसरी तरफ ज़ी मराठी पर उनका नया सीरियल 'येतेच आता मी नांदायला' शुरू होने वाला है।
यह सीरियल 30 नवंबर से शुरू होगा। शूटिंग की भागदौड़ में पूजा को दिवाली के पकवान बनाने का वक्त नहीं मिला। फिर भी सास और नानी के बनाए पकवान खाकर उन्होंने त्योहार का भरपूर मज़ा लिया।
अपने जश्न के बारे में पूजा ने कहा, "दिवाली मेरा सबसे पसंदीदा त्योहार है। नए साल का कैलेंडर हाथ में आते ही मैं सबसे पहले यही देखती हूं कि दिवाली कब है। अभी नए सीरियल की शूटिंग चल रही है, इसलिए मुझे पकवान बनाने का वक्त नहीं मिला। लेकिन मेरी सास ने बेसन के लड्डू और नानी ने शकरपारे बनाए हैं। यानी मैंने खुद कुछ नहीं बनाया, पर पेट भरकर खाया ज़रूर है।"
उन्होंने मज़ाक में यह भी कहा कि एक तरफ वे पूजा बनकर बांदेकर परिवार के घर में रहने आई हैं, तो दूसरी तरफ 'शिवानी कदम' बनकर दर्शकों के दिल में 'येतेच आता मी नांदायला' कह रही हैं। यह सुनकर सब हंस पड़े।
शूटिंग के बावजूद पूजा घर की हर बात में शामिल रही हैं। पहली दिवाली और पहली पड़वा के बारे में उन्होंने कहा, "शादी के बाद की यह पहली दिवाली है, इसलिए घर में अलग ही उत्साह है। खरीदारी का भी बड़ा प्लान है। पहली पड़वा पर सोहम की आरती उतारना और बदले में सोहम से मिलने वाला खास तोहफा, इसे लेकर मैं बहुत उत्सुक हूं।"
पड़वा के दिन पत्नी पति की आरती उतारती है और पति पत्नी को तोहफा देता है। पूजा को जानना है कि सोहम क्या देंगे। बताया जा रहा है कि सोहम ने भी कुछ खास सोच रखा है।
बचपन की यादों पर पूजा ने बताया कि उनकी दिवाली मामा के गांव में नाना-नानी के पास मनाई जाती थी। कॉलेज के दिनों में उन्होंने पुणे में दिवाली मनाई।
उन्होंने कहा, "पटाखों से होने वाले प्रदूषण के बारे में मुझे बचपन से पता था। मम्मी-पापा ने मुझे कभी रोका नहीं, फिर भी मैं सिर्फ 2 से 3 पटाखे फोड़ती थी और ढेर सारे दिये जलाकर दिवाली मनाती थी। छोटी उम्र में ही मैं समझ गई थी कि दिवाली की असली मज़ा पटाखों में नहीं, परिवार के साथ वक्त बिताने में है।"
घर की खास परंपरा के बारे में पूजा ने बताया कि दिवाली के दिनों में घर में पकवानों की खुशबू फैलती है। अभ्यंग स्नान के बाद पूरा परिवार सुबह की नरम धूप में बैठकर साथ पकवान खाता है और गपशप करता है। पूजा के मुताबिक यही दिवाली की असली खुशी है।


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