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साय डोंगर की पेड़कटाई पर राज ठाकरे के साथ खड़े हुए जैन मुनि निलेशचंद्र

जैन मुनि निलेशचंद्र ने साय डोंगर की पेड़कटाई पर राज ठाकरे के रुख का समर्थन किया है और बुलाए जाने पर आंदोलन में शामिल होने की बात कही है।

साय डोंगर की पेड़कटाई पर राज ठाकरे के साथ खड़े हुए जैन मुनि निलेशचंद्र तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कर्जत-भीमाशंकर इलाके के साय डोंगर में चल रही पेड़ों की कटाई का मामला अब और गरमा गया है। स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी इस काम का विरोध कर रहे हैं, और राजनीतिक नेता भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते दिख रहे हैं। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सरकार को खरी-खरी सुनाई है और आंदोलन करने की तैयारी भी दिखाई है। अब इस पूरे मामले पर जैन मुनि निलेशचंद्र की भी प्रतिक्रिया आई है।

जैन मुनि निलेशचंद्र ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे के पर्यावरण को लेकर रुख का समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर राज ठाकरे बुलाएंगे, तो वे खुद आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं। यह समर्थन उन्होंने पर्यावरण के सवाल पर दिया है।

साय डोंगर की पेड़कटाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इसी माहौल में निलेशचंद्र मुनि ने भगवान महावीर के विचार 'जिओ और जीने दो' का जिक्र किया। उनका कहना था कि अगर राज ठाकरे पेड़ों और जानवरों की हिफाजत के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो उनके इस रुख को उनका समर्थन है।

कबूतरों का मुद्दा और जंगल बचाने का सवाल अलग-अलग हैं, यह कहते हुए उन्होंने पर्यावरण की रक्षा के लिए हो रही कोशिशों के साथ खड़े होने की बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी से कोई वास्ता नहीं है, और पेड़ों और जीवों को बचाने वालों के पीछे समाज खड़ा रहेगा।

निलेशचंद्र मुनि के मुताबिक, राज ठाकरे न्योता देंगे तो वे कर्जत जाकर आंदोलन में हिस्सा लेने को तैयार हैं। उन्होंने यह रुख भी रखा कि कंपनी कोई भी हो, पर्यावरण के मुद्दे पर वे उसका समर्थन नहीं करेंगे।

इस बीच विधायक आदित्य ठाकरे साय डोंगर का दौरा कर चुके हैं। राज ठाकरे इस इलाके में जाने वाले हैं, इसलिए इस मामले की तरफ राजनीतिक और पर्यावरण, दोनों नजरियों से ध्यान खिंच रहा है।

साय डोंगर की पेड़कटाई और टोरंट प्रोजेक्ट से जुड़े फैसलों पर स्थानीय लोगों ने एतराज जताया है। प्रोजेक्ट की जनसुनवाई में स्थानीय लोगों का भारी विरोध था, फिर भी आगे की प्रक्रिया कैसे चलाई जा रही है, यह सवाल उन्होंने उठाया है।

स्थानीय नागरिक, पर्यावरण प्रेमी और कुछ राजनीतिक नेता इस मुद्दे पर विरोध दर्ज करा रहे हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि पेड़कटाई को लेकर प्रशासन का रुख क्या रहता है और आंदोलन को आगे किसका साथ मिलता है।

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