मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

चंद्रपुर के सावली तालुका में बाघ का आतंक, एक महीने में तीन गुराखियों की मौत

चंद्रपुर जिले के सावली तालुका में बाघ के हमलों से लोगों में दहशत, वनविभाग ने बाघ को पकड़ने का प्रस्ताव तैयार किया

चंद्रपुर के सावली तालुका में बाघ का आतंक, एक महीने में तीन गुराखियों की मौत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चंद्रपुर जिले के सावली तालुका के सामदा बुज, केरोडा, व्याहाड बुज, निलसनी पेटगाव और सोनापुर इलाकों में पिछले दो-तीन महीनों से बाघ की दहशत ने लोगों को डरा रखा है। इस इलाके में बाघ ने लगातार हमले करके इंसानों की जान ली है, जिससे किसानों और गुराखियों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। खास बात यह है कि पिछले एक महीने में एक ही बाघ ने तीन गुराखियों की जान ले ली, वहीं एक किसान को भी बाघ ने बुरी तरह घायल कर दिया। लेकिन हमला करने वाला बाघ अभी तक खुला घूम रहा है, जिसकी वजह से लोगों में वनविभाग के काम करने के तरीके को लेकर गुस्सा भड़क रहा है।

1 अगस्त को गुराखी हिरामण साखरे (निवासी सामदा) पर बाघ ने हमला करके उनकी जान ले ली। इसके बाद 26 अगस्त को नामदेव कुकडे (निवासी केरोडा) पर बाघ ने हमला किया, जिसमें वे घायल हो गए। 12 सितंबर को किसान अशोक ठाकरे (निवासी व्याहाड बुज) के बैल पर बाघ ने हमला करके उसे मार डाला। इसी दौरान 16 सितंबर को वासुदेव वाकुडकर (निवासी निलसनी) पर बाघ ने हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके के लोगों में डर और बढ़ गया, तभी सोमवार शाम को युवा गुराखी हेमंत अशोक भुरसे (निवासी सामदा बुज) पर बाघ ने हमला करके उनकी जान ले ली।

लगातार हो रही इन घटनाओं की वजह से सावली तालुका के लोगों की सुरक्षा का सवाल गंभीर हो गया है। इस इलाके के ज्यादातर किसान पशुपालन पर निर्भर हैं। गुरे चराने के लिए किसानों और गुराखियों को जंगल से सटे इलाके में जाना पड़ता है। लेकिन बाघ की बढ़ती मौजूदगी और लगातार हो रहे हमलों की वजह से गुरे चराने के लिए बाहर निकलना भी खतरनाक हो गया है। तीनों गुराखी मारे जाने के बाद गांव वालों के सामने अब गुरे चराने का सवाल भी गंभीर हो गया है। लोगों की मांग है कि वनविभाग बाघ को तुरंत पकड़ने के लिए ठोस और असरदार कदम उठाए। सावली तालुका में पिछले एक महीने में बाघ के हमले की तीन घटनाएं हुई हैं, और तीनों ही घटनाओं में गुरे चराने गए लोगों की दुखद मौत हुई है। कापसी के सामाजिक कार्यकर्ता भाऊराव कोठारे का कहना है कि बाघ को काबू में करने के साथ-साथ वनविभाग को गुरे चराने के लिए सुरक्षित जगह देना बहुत जरूरी है। उनकी मांग है कि लोगों की जान बचाने के लिए वनविभाग तुरंत ठोस कदम उठाए और नरभक्षी बाघ को जल्द से जल्द पकड़े।

चंद्रपुर के विभागीय वन अधिकारी राजन तलमले ने पुष्टि की कि सामदा बुज इलाके में घूमने वाले एक ही बाघ ने तीनों की जान ली है। उन्होंने बताया कि बाघ को पकड़ने का प्रस्ताव तैयार किया गया है और प्रस्ताव मंजूर होते ही बाघ को पकड़ लिया जाएगा। उनके मुताबिक जंगल इलाके में वनविभाग की टीम बाघ के पीछे लगी हुई है, और उन्होंने किसानों व गुराखियों से अपील की है कि जंगल इलाके में जाते समय उचित सावधानी बरतें और वनविभाग के निर्देशों का पालन करें।

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