सावली के बोथली में जातिसूचक अपमान का आरोप, तीन महिलाओं पर केस दर्ज
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चंद्रपुर जिले के बोथली में शारदा उत्सव के दौरान जाति को लेकर भेदभाव और सार्वजनिक अपमान की शिकायत पर सावली पुलिस ने तीन महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है।
चंद्रपुर जिले के सावली पुलिस स्टेशन के इलाके में आने वाले बोथली गांव में शारदा उत्सव के दौरान जाति को लेकर भेदभाव और सार्वजनिक जगह पर अपमान किए जाने की शिकायत पुलिस तक पहुंची है। सावली पुलिस ने इस मामले में तीन महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस घटना से इलाके में हलचल है।
यह केस बोथली की श्रीमती मिनाक्षी बापुजी पोवरे की शिकायत पर दर्ज हुआ है। शिकायत के मुताबिक पिछले साल सावली इलाके के वार्ड नंबर 02 में कुछ महिलाओं ने मिलकर संयुक्त शारदा महिला मंडल बनाया था। उसमें शिकायतकर्ता के साथ मातंग समाज की दूसरी महिलाएं भी शामिल हुईं और शारदा उत्सव बड़ी खुशी से मनाया गया। इस साल भी वार्ड में शारदा देवी की स्थापना की गई। हमेशा की तरह समाज की महिलाओं ने चंदा जमा करने से लेकर बाकी कामों तक में हिस्सा लिया।
शिकायत के हिसाब से झगड़े की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को हुई, जब संयुक्त शारदा महिला मंडल की तरफ से खाने का आयोजन रखा गया था। मिनाक्षी पोवरे और दूसरी महिलाएं खाना बनाने पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि उन्हें जानबूझकर आटा गूंथने, सब्जी काटने और रोटी बनाने से दूर रखा जा रहा है। खुशी का दिन था, इसलिए उन्होंने उस वक्त कुछ नहीं कहा। मंडल के कहने पर उन्होंने चावल और लाई साफ करने का काम पूरा किया।
इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को देवी का विसर्जन हुआ। फिर 26 अक्टूबर को मंडल का हिसाब करने के लिए देवी के सामने वाली सड़क पर बैठक बुलाई गई। बैठक में मंडल के पदाधिकारियों समेत करीब 30 से 35 महिलाएं मौजूद थीं। शिकायतकर्ता ने वहां कहा कि अगर हमारे साथ ऐसा भेदभाव किया जाएगा तो हम मंडल में नहीं रहेंगे।
शिकायत में आरोप है कि इस पर कौशल्या अरुण सुरपाम ने उनसे न रहने की बात कहकर चंदा मांगा। कुसुम पेंदोर ने कहा, "आप हाथ लगाओगे तो बाकी औरतें खाना नहीं खातीं, हमारा खाना बर्बाद करें क्या?" बेबीबाई चंद्राशा पेंदोर ने भी यह कहकर समाज का अपमान किया कि आपके समाज की महिलाएं खाना बनाएं तो बाकी लोग खाने नहीं आते और चंदा भी नहीं देते। यह सब शिकायत में आरोप के तौर पर दर्ज है।
शिकायत के अनुसार बात यहीं नहीं रुकी। 28 अक्टूबर 2026 को रात करीब साढ़े आठ बजे सारिका निरुडवार और शिवानी निरुडवार के बीच किसी वजह से झगड़ा हुआ। आरोप है कि झगड़ा शांत होने के बाद शिवानी स्वप्नील निरुडवार नरेश आलम के घर के सामने आई और मातंग समाज के बारे में बेहद अपमानजनक, हीन और जातिसूचक भाषा में गाली-गलौज की। इस तरह सार्वजनिक जगह पर समाज को नीचा दिखाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों को पता था कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति की हैं, फिर भी सार्वजनिक जगह पर जानबूझकर हीन बर्ताव किया गया और छुआछूत के कारण उनका अपमान किया गया। शिकायतकर्ता की मौखिक शिकायत पर सावली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने शिवानी स्वप्नील निरुडवार, बेबीबाई चंद्राशा पेंदोर और कुसुम रतनशा पेंदोर, इन तीन महिलाओं के खिलाफ नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 की धारा 7(1)(ड) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार प्रतिबंधक) अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(र) के तहत केस दर्ज किया है। मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक सचिन विनायक मुसले कर रहे हैं। ये सभी बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और जांच जारी है।
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