सातारा: खान-क्रशर प्रोजेक्ट के खिलाफ बावधन सहित दस गांवों के किसान, महिलाएं एकजुट हुए
बावधन चावडी पर हुई बैठक में इलाके के ग्रामीणों ने प्रस्तावित खान क्रशर प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध किया है और प्रशासनिक हलचल तुरंत रोकने की मांग की है।
सातारा जिले के बावधन इलाके में प्रस्तावित खान-क्रशर प्रोजेक्ट के खिलाफ बावधन चावडी में किसानों और ग्रामीणों की बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में बावधन सहित आसपास के दस से ज्यादा गांवों से करीब ढाई हजार किसान, महिलाएं, छात्र और ग्रामीण मौजूद थे।
बावधन, नागेवाडी, दरेवाडी, कनूर, अनपटवाडी, म्हातेकरवाडी, वाघजाईवाडी, पांढरेचीवाडी, शेलारवाडी और व्याजवाडी इन गांवों के नागरिक इस बैठक में शामिल हुए थे। मौजूद किसानों, महिलाओं और छात्रों ने अपनी अपनी भावनाएं रखते हुए खान-क्रशर प्रोजेक्ट की वजह से होने वाली दिक्कतें प्रशासन के सामने रखीं। खान और क्रशर की वजह से खेती, पानी, सड़कें, आवागमन और पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका होने के चलते प्रोजेक्ट का एकजुट होकर विरोध करने का फैसला इस बैठक में लिया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, साल 2022 में सांसद उदयनराजे भोसले के नाम की जमीन से सटी जमीन की नापी की गई थी। लेकिन यह नापी करते वक्त आसपास के जमीन मालिकों को पूरी जानकारी नहीं दी गई, ऐसा आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। बावधन, अनपटवाडी और वाघजाईवाडी इन ग्रामपंचायतों ने खान-क्रशर के खिलाफ प्रस्ताव पहले ही पास कर दिए थे, फिर भी आगे की प्रक्रिया शुरू होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और सवाल उठाया।
कुछ किसानों ने नापी प्रक्रिया पर संबंधित अधिकारियों के पास पहले ही आपत्तियां दर्ज कराई हैं, और नापी की दोबारा जांच कराने की मांग की है, यह भी ग्रामीणों ने बताया। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के वक्त इलाके के ग्रामीणों का विरोध रहा तो खान शुरू नहीं की जाएगी, ऐसा वादा सांसद उदयनराजे भोसले ने दिया था, ऐसा दावा ग्रामीणों ने बैठक में किया। लेकिन उसके बाद भी प्रोजेक्ट को लेकर हलचल जारी रहने से ग्रामीणों में तीखी नाराजगी है, ऐसा बताया गया।
इसी मुद्दे पर पिछले दस दिनों से कुछ युवा किसान वाई तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठे हैं। अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ रही है, यह कहते हुए प्रशासन इस मसले पर तुरंत ध्यान देकर हल निकाले, ऐसी मांग बैठक में की गई।
खान-क्रशर प्रोजेक्ट शुरू होने पर इलाके की खेती, पानी के स्रोत, जमीन की उपजाऊ क्षमता, सड़कों पर आवागमन और किसानों की आमदनी पर असर पड़ने का डर ग्रामीणों ने जताया। इसलिए संबंधित प्रशासन सभी पहलुओं पर विचार करके ग्रामीणों का पक्ष समझे और प्रोजेक्ट को लेकर सही फैसला ले, ऐसी मांग की गई।
इस बीच, खान-क्रशर को मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी तो आंदोलन और तेज करने की चेतावनी ग्रामीणों ने दी। जरूरत पड़ने पर मुंबई के मंत्रालय तक मोर्चा निकालकर आंदोलन करने का फैसला भी इस मौके पर जताया गया।