सऊदी में दो बांग्लादेशियों को चुपचाप फांसी, 20 और कैदियों की सज़ा पर सवाल
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को बिना किसी पूर्वसूचना के फांसी दिए जाने से दोनों देशों के बीच हलचल मच गई है।
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सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को चुपचाप फांसी की सज़ा सुनाकर उस पर अमल कर दिया गया। यह बात सामने आने के बाद दोनों देशों के राजनयिक हलकों में जबरदस्त हलचल है। अब सऊदी की अलग-अलग जेलों में बंद बाकी 20 बांग्लादेशी कैदियों के भविष्य और उनकी सज़ा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सऊदी प्रशासन ने बांग्लादेश दूतावास को जो आधिकारिक लिस्ट दी, उसमें इन कैदियों के नाम के आगे "दोषी" (Convicted) लिखा है, लेकिन उन्हें कौन सी सज़ा मिली है, इसकी जानकारी पूरी तरह खाली छोड़ दी गई है।
प्रथम आलो (Prothom Alo) की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब की भेजी शुरुआती लिस्ट में नझरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर के नाम भी थे। फिर भी बिना किसी पूर्वसूचना के और राजनयिकों को अंधेरे में रखकर दोनों को फांसी दे दी गई। इस खबर से बांग्लादेश में गुस्से की लहर है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सीधा सवाल उठाया है कि किसी नागरिक को मौत की सज़ा सुनाने और उस पर अमल करने से पहले संबंधित देश के दूतावास को आधिकारिक जानकारी क्यों नहीं दी गई।
शुरुआती खबरों में कहा गया था कि नझरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर पति-पत्नी थे और सऊदी पुलिस ने उन पर मक्का की पवित्र मस्जिद के परिसर में अनैतिक काम करने का गंभीर आरोप लगाया था। लेकिन दोनों के परिवारों ने ये सारे आरोप सिरे से खारिज कर दिए हैं। रिश्तेदारों का कहना है कि नझरुल और स्वीटी के बीच कोई वैवाहिक रिश्ता नहीं था। दोनों सऊदी में एक ही सफाई कंपनी (Al-Majal Company) में काम करते थे।
नझरुल के परिवार का दावा है कि काम की जगह पर हुए झगड़े के बाद एक सहकर्मी ने उनके खिलाफ साज़िश रची और उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया गया। स्वीटी अख्तर के परिवार के मुताबिक काम की जगह पर विवाद के बाद उन्हें अगस्त 2023 में गिरफ्तार किया गया था। दोनों पीड़ितों के परिवारों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि अदालत के फैसले के दौरान उन्हें अपनी बात रखने के लिए न वकील मिला और न निष्पक्ष सुनवाई का कोई मौका।
प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने 30 सितंबर को जेद्दाह में बांग्लादेश के वाणिज्य दूतावास को कुल 2,461 बांग्लादेशी कैदियों की लिस्ट सौंपी थी। लिस्ट की बारीकी से जांच हुई तो उसमें 22 कैदियों के नाम के आगे "दोषी" (Convicted) लिखा मिला। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि फैसले का सारांश, सज़ा की मियाद और सज़ा का स्वरूप बताने वाले कॉलम पूरी तरह खाली थे। इन 22 में से दो को फांसी दी जा चुकी है, इसलिए बाकी 20 कैदियों की हालत को लेकर भारी अस्पष्टता और डर का माहौल है। बांग्लादेश सरकार और कैदियों के परिवारों को सता रहा है कि कहीं इन 20 को भी चुपचाप फांसी न दे दी जाए।
सऊदी प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक इन 22 बांग्लादेशियों पर बेहद गंभीर मामले दर्ज हैं। इनमें 8 पर हत्या का आरोप है, 5 पर नशीले पदार्थों की तस्करी का और 5 पर निजी अधिकारों के उल्लंघन का। 2 मामले सऊदी कानून के उल्लंघन के हैं, 1 मामला साइबर अपराध से जुड़ा है और 1 मामला व्यभिचार (Adultery) से जुड़ा है। ये कैदी इस समय जेद्दाह की धाहबान जेल, शुमैसी जेल, जेद्दाह सेंट्रल जेल, साथ ही नजरान, खमिस, अल-बाहा, हादा और जेद्दाह की महिला जेल में बंद हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जेद्दाह में बांग्लादेश के महावाणिज्य दूतावास ने सऊदी अधिकारियों से फौरन सफाई मांगी है। 19 अक्टूबर को बांग्लादेश दूतावास ने सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की जेद्दाह शाखा को आधिकारिक राजनयिक पत्र (Diplomatic Note) भेजा। इस पत्र में सभी दोषी कैदियों के अदालती मुकदमों का पूरा ब्योरा, फैसले की कॉपी और उन्हें दी गई सज़ा की सही जानकारी मांगी गई है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और वियना कन्वेंशन (Vienna Convention) के नियमों के मुताबिक किसी विदेशी नागरिक पर कानूनी कार्रवाई करते समय या उसे सज़ा सुनाते समय संबंधित देश के दूतावास को सूचित करना ज़रूरी होता है। सऊदी अरब ने यह जानकारी साझा नहीं की, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल बांग्लादेश सरकार सऊदी अरब के आधिकारिक जवाब का इंतज़ार कर रही है और अपने नागरिकों को कानूनी मदद दिलाने की कोशिश में लगी है।
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