सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 09:18 IST

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का ऐलान: शांति के लिए परमाणु तकनीक, कई देशों ने जताया शुक्रिया

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का ऐलान: शांति के लिए परमाणु तकनीक, कई देशों ने जताया शुक्रिया तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA2026) में भारत ने एक बार फिर साफ कहा है कि वह परमाणु विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ अपनी तरक्की के लिए नहीं करेगा। भारत का कहना है कि यह इस्तेमाल पूरी दुनिया की भलाई के लिए, खासकर विकासशील देशों के लिए, शांति के रास्ते से होना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि टिकाऊ विकास हासिल करने और इंसानी क्षमताएं बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की भूमिका को भारत का पूरा समर्थन है। भारत के इस रुख और उसकी मदद के लिए दुनिया भर के कई छोटे-बड़े देशों ने खुलकर शुक्रिया कहा है।

भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख और सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने महासभा में भारत का आधिकारिक पक्ष रखा। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि IAEA सदस्य देशों में परमाणु विज्ञान के सुरक्षित और शांतिपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभा रही है। संस्थागत क्षमता मजबूत करना, कानूनी और नियामक ढांचा बनाना और जरूरतमंद देशों को सही तकनीकी मार्गदर्शन देना, इन सब में IAEA की पहल तारीफ के लायक हैं।

भारत ने IAEA के तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (Technical Cooperation Programme) को अपना समर्थन फिर से जताया है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन ने X पर की गई अपनी आधिकारिक पोस्ट में कहा कि भारत ने हमेशा वैश्विक शांति और तकनीक के बराबर बंटवारे पर जोर दिया है। भारत की नीति यही कहती है कि परमाणु शक्ति का इस्तेमाल तबाही के लिए नहीं, बल्कि इंसानी सेहत, खेती, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण की हिफाजत के लिए होना चाहिए।

परमाणु तकनीक में भारत की कामयाबी और आत्मनिर्भरता आज पूरी दुनिया में तारीफ का मुद्दा है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में 500 मेगावॉट क्षमता के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) में मिली कामयाबी हो, या न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) की सुरक्षित बिजली पैदा करने की बात, भारत का सुरक्षा रिकॉर्ड दुनिया में अव्वल दर्जे का रहा है। इसी तकनीकी क्षमता के सहारे भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) के लिए पहल कर रहा है।

परमाणु विज्ञान के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का अच्छा उदाहरण मेडिकल रिसर्च है। भारत ने टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) के जरिए BIMSTEC देशों, यानी बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के मेडिकल एक्सपर्ट्स को कैंसर के इलाज की मुफ्त ट्रेनिंग (Cancer Care Training) दी है। परमाणु ऊर्जा के जरिए कैंसर की पहचान और इलाज को आसान बनाना भारत की 'नेबरहूड फर्स्ट' यानी पड़ोसी पहले और 'विश्वबंधु' नीति की सीधी मिसाल है।

22 अक्टूबर को भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी फंड (India-UN Development Partnership Fund) का 9वां सालाना कार्यक्रम हुआ। इसमें दुनिया भर के कई विकासशील और द्वीपीय देशों ने भारत से मिली विकास मदद और आर्थिक सहायता की खुलकर तारीफ की। साल 2017 में शुरू हुए 150 मिलियन डॉलर के इस फंड से भारत ग्लोबल साउथ के देशों में सड़क, बुनियादी ढांचे, डिजिटल हेल्थ, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मदद दे रहा है।

मोल्दोवा के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत जॉर्ज लुका ने कहा, "जब दुनिया भर में विकास फंड पर दबाव है, ऐसे वक्त में भारत की लगातार और बिना शर्त मदद बहुत सकारात्मक संदेश देती है। भारत का सहयोग आपसी सम्मान और हमारी राष्ट्रीय जरूरतों पर टिका है।"

माइक्रोनेशिया के राजदूत जीम लिपवे ने बताया कि भारत ने राष्ट्रपति के निवास और दफ्तर में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट लगाने में मदद की है। उनके मुताबिक स्वच्छ और हरे-भरे भविष्य के लिए भारत सचमुच तारीफ के लायक काम कर रहा है। श्रीलंका के राजदूत जयनाथा जयसूर्या और तंजानिया के प्रतिनिधि टोगोलानी एड्रिस मावुरा ने भी भारत के कई टिकाऊ विकास प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई मदद के लिए दिल से शुक्रिया कहा। लाओस के राजदूत थोंगफेन सवानाफेट ने विकासशील देशों को साथ लाने और उनकी क्षमता बढ़ाने में भारत की अगुवाई को सलाम किया।

संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा में यह साफ हुआ कि भारत सिर्फ अपनी तरक्की नहीं कर रहा, बल्कि अपना ज्ञान और तकनीक दुनिया के आखिरी इंसान तक पहुंचा रहा है। परमाणु शक्ति का सुरक्षित इस्तेमाल, जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सोलर एनर्जी को बढ़ावा और दुनिया भर में सेहत सेवाओं का विस्तार, इन सबसे भारत अपनी 'विश्वबंधु' की भूमिका को सही साबित कर रहा है। अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों ने भरोसा जताया है कि आने वाले वक्त में भारत का यह तकनीकी और कूटनीतिक सहयोग और मजबूत होगा और वैश्विक शांति और विकास को नई दिशा देगा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे