संयुक्त राष्ट्र दिन: 24 अक्टूबर 1945 को बनी संस्था आज 193 देशों की आवाज़
24 अक्टूबर को दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र दिन मनाया जाता है, जो दूसरे महायुद्ध के बाद शांति के लिए बनी संस्था की स्थापना की याद दिलाता है।
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हर साल 24 अक्टूबर को पूरी दुनिया में 'संयुक्त राष्ट्र दिन' (United Nations Day) बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह दिन विश्व इतिहास के एक बेहद अहम मोड़ की याद दिलाता है। इसी तारीख को, यानी 24 अक्टूबर 1945 को, 'संयुक्त राष्ट्र संघ' (UNO) औपचारिक रूप से वजूद में आया था।
उस वक्त दुनिया दूसरे महायुद्ध की भयानक तबाही से गुज़री थी। अरबों का नुकसान हुआ था, हज़ारों बेगुनाहों की जान गई थी और अलग-अलग देशों के बीच भरोसा कमज़ोर पड़ चुका था। पूरी इंसानियत मुसीबत में थी। ऐसे में दुनिया के नेताओं ने एक साथ आकर संयुक्त राष्ट्र की बुनियाद रखी।
इसका मकसद साफ था। भविष्य में तीसरा महायुद्ध कभी न हो और देशों के बीच जो मतभेद या झगड़े पैदा हों, वे जंग के बजाय शांति से बातचीत के ज़रिए सुलझाए जाएं। दुनिया को संकट से निकालकर एक महफूज़ आने वाला कल देना ही इसकी असली वजह थी।
शुरुआत में कुछ ही देशों के साथ चला यह सफर आज दुनिया भर के 193 सदस्य देशों तक पहुंच चुका है। आज संयुक्त राष्ट्र सिर्फ जंग के वक्त बीच-बचाव करने वाला मंच नहीं रह गया है। गरीबी हटाना, मौसम में बदलाव, महिला-पुरुष की गैर-बराबरी, सेहत की दिक्कतें और आतंकवाद जैसी बड़ी वैश्विक चुनौतियों का हल खोजने के लिए भी यह एक अहम मंच बन गया है। यह संस्था लगातार कोशिश करती है कि धरती के हर इंसान को महफूज़, इज़्ज़त वाली और इंसाफ भरी ज़िंदगी जीने का मौका मिले।
संयुक्त राष्ट्र दिन के मौके पर सभी सदस्य देशों में तरह-तरह के कार्यक्रम होते हैं। इनमें मुख्य रूप से शांति मार्च, परिचर्चाएं, शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम और दुनिया के मुद्दों पर निबंध या चित्रकला की प्रतियोगिताएं शामिल होती हैं। इनके ज़रिए नई पीढ़ी को वैश्विक शांति, आपसी सहयोग और मानवाधिकारों की अहमियत समझाई जाती है।
आज के दौर में जब कई देशों के बीच तनाव का माहौल बनता है, तब यह दिन एकता, सबको साथ लेकर चलने और दुनिया भर में भाईचारे को अपनाने का कीमती संदेश देता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा होने वाले टकरावों का शांतिपूर्ण रास्ता खोजने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी संस्थाएं, जैसे यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनेस्को, प्राकृतिक आपदा या महामारी के वक्त प्रभावित देशों तक फौरन इंसानी मदद पहुंचाने का काम भी करती हैं।
इसलिए 24 अक्टूबर सिर्फ एक संस्था की सालगिरह नहीं है। यह धरती पर इंसानियत के भविष्य और शांति के लिए वचनबद्ध रहने का संकल्प दिन है।
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