रॉयल एनफील्ड के 125 साल: इंग्लैंड की साइकिल कंपनी से 60 से ज़्यादा देशों तक का सफर
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इंग्लैंड में साइकिल के छोटे कारोबार से शुरू हुई रॉयल एनफील्ड आज आयशर मोटर्स की कंपनी है। भारत में उसके 2,000 से ज़्यादा स्टोर हैं और दुनिया के 60 से ज़्यादा देशों में नेटवर्क है।
आपके दोस्तों के ग्रुप में किसी न किसी के पास रॉयल एनफील्ड बाइक ज़रूर होगी। नहीं भी होगी, तो किसी को या खुद आपको इसे लेने की इच्छा होगी। सवाल यह है कि इतने मशहूर इस ब्रांड का इतिहास क्या है और यह कंपनी भारत और दुनिया में इतनी पहचान कैसे बना पाई।
रॉयल एनफील्ड दुनिया के सबसे पुराने मोटरसाइकिल ब्रांडों में से एक है, जिसका प्रोडक्शन लगातार चलता रहा है। 19वीं सदी के आखिर में इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति का असर बढ़ रहा था। उसी दौर में एक छोटे साइकिल कारोबार से इस ब्रांड का जन्म हुआ। सफर की शुरुआत जॉर्ज टाउनसेंड एंड कंपनी से हुई, जो साइकिल और सुई बनाती थी। 1891 में अल्बर्ट एडी और बॉब वॉकर स्मिथ नाम के दो उद्योगपतियों ने यह कारोबार अपने हाथ में ले लिया। 1893 में कंपनी का नाम "एनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी" रखा गया।
1894 में कंपनी की साइकिलों को "रॉयल एनफील्ड" नाम मिला। 1901 में कंपनी ने अपनी पहली मोटरसाइकिल बनाई और बाइक की दुनिया में नया दौर शुरू हुआ। जॉर्ज टाउनसेंड के मूल कारोबार ने नींव रखी थी, लेकिन रॉयल एनफील्ड ब्रांड की स्थापना अल्बर्ट एडी और बॉब वॉकर स्मिथ ने की, ऐसा कहना चाहिए।
1932 में इंग्लैंड की इस कंपनी ने पहली बार बुलेट मॉडल पेश किया, जो आगे चलकर उसकी पहचान बन गया। दूसरे विश्व युद्ध के समय कंपनी ने सेना के लिए मोटरसाइकिल और साइकिलें बनाईं। फिर इंग्लैंड की कंपनी ने मद्रास मोटर्स के साथ साझेदारी करके भारत में "एनफील्ड इंडिया" शुरू की। 1955 में मद्रास में कंपनी का प्रोडक्शन प्लांट चालू हुआ। भारतीय सेना के लिए बुलेट की मांग बढ़ी, तो ब्रांड को भारत में मज़बूत ज़मीन मिल गई।
1990 में आयशर ग्रुप ने एनफील्ड इंडिया में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी ली। 1993 में आयशर ने 60 प्रतिशत हिस्सेदारी लेकर कंपनी पर कंट्रोल हासिल कर लिया। 1994 में एनफील्ड इंडिया का नाम बदलकर "रॉयल एनफील्ड मोटर्स" कर दिया गया।
आज रॉयल एनफील्ड आयशर मोटर्स लिमिटेड की कंपनी है। आयशर मोटर्स के एक्ज़ीक्यूटिव चेयरमैन सिद्धार्थ लाल ने ब्रांड को दोबारा खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। इस वक्त बी. गोविंदराजन आयशर मोटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और रॉयल एनफील्ड के CEO हैं। आयशर मोटर्स के बोर्ड में सिद्धार्थ लाल, विनोद अग्रवाल और बी. गोविंदराजन के साथ स्वतंत्र निदेशक इंदर मोहन सिंह, एस. माधवन, तेजप्रीत एस. चोपड़ा, अरुण वासु और इरा गुप्ता शामिल हैं।
बुलेट, क्लासिक 350, हंटर 350, इंटरसेप्टर 650 और हिमालयन जैसे मॉडलों की वजह से रॉयल एनफील्ड को भारत में खूब लोकप्रियता मिली। कंपनी ने राइडिंग कम्युनिटी, Motoverse और हिमालयन ओडिसी जैसी पहल से ग्राहकों, खासकर नौजवानों, को ब्रांड से जोड़े रखा।
भारत में कंपनी के 2,000 से ज़्यादा स्टोर हैं। दुनिया के 60 से ज़्यादा देशों में करीब 850 स्टोर हैं। चेन्नई के पास ओरगडम और वल्लम वडागल में प्रोडक्शन प्लांट हैं। ब्रिटेन के ब्रंटिंगथॉर्प और चेन्नई में टेक्निकल सेंटर हैं। बांग्लादेश, नेपाल, ब्राज़ील, थाईलैंड, अर्जेंटीना और कोलंबिया में CKD असेंबली की सुविधा है।
कंपनी की रणनीति पुराने डिज़ाइन की विरासत को बनाए रखते हुए आधुनिक टेक्नोलॉजी, नई इंजन क्षमता और दुनिया के बाज़ारों में विस्तार की है। 350cc से 750cc के मोटरसाइकिल सेगमेंट पर ध्यान देकर कंपनी ने इंटरसेप्टर 650 और कॉन्टिनेंटल GT 650 जैसे मॉडल उतारे। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए फ्लाइंग फ्ली ब्रांड की शुरुआत भी कंपनी के आगे के विस्तार का हिस्सा है।
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