रिटायरमेंट के दूसरे दिन ही रेलवे अफसर को 32.42 लाख का चूना
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
उम्मीद मेडिकल कार्ड अपडेट करने के नाम पर भेजी एपीके फाइल, साइबर ठगी में गई जीवनभर की कमाई
नागपुर.
रेलवे से 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हुए एक अधिकारी को साइबर अपराधियों ने रिटायरमेंट के महज दूसरे दिन ही 32 लाख 42 हजार रुपये का चूना लगा दिया. उम्मीद मेडिकल कार्ड अपडेट करने का झांसा देकर उन्हें एपीके फाइल भेजी गई. फाइल डाउनलोड करते ही साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते पर सेंध लगा दी और सेवानिवृत्ति के बाद मिली पूरी रकम उड़ा ली. साइबर ठगी की इस वारदात से रेलवे महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
अमरावती मार्ग निवासी 60 वर्षीय रविंद्र सिंह बनाफर रेलवे में असिस्टेंट वर्क ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे. वे 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हुए थे. रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों को उम्मीद मेडिकल कार्ड जारी किया जाता है. इसके माध्यम से वे और उनके परिजन रेलवे से संबद्ध अस्पतालों में उपचार की सुविधा प्राप्त करते हैं. 2 नवंबर की सुबह बनाफर के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया. उसने खुद को रेलवे का एपीओ अधिकारी हेमराज विश्वकर्मा बताया. फोन करने वाले ने कहा कि उनका उम्मीद मेडिकल कार्ड अपडेट करना है. इसके लिए वह मोबाइल पर एक ऐप भेज रहा है, जिसे डाउनलोड करना होगा.
रेलवे अधिकारी होने का भरोसा दिलाकर साइबर अपराधी ने बनाफर को ऐप के बजाय एपीके फाइल भेज दी. उसकी बातों में आकर बनाफर ने फाइल डाउनलोड कर ली. इसके बाद साइबर अपराधियों को उनके मोबाइल की महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंच मिल गई. ठग ने विश्वास कायम रखने के लिए उनसे परिजनों की जानकारी, मोबाइल नंबर और आधार नंबर भी पूछे. इसी दौरान साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से 32 लाख 42 हजार 150 रुपये निकाल लिए. यह रकम उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद रेलवे से प्राप्त हुई थी. जीवनभर की नौकरी के बाद मिली जमा-पूंजी एक झटके में गायब होने से बनाफर के पैरों तले जमीन खिसक गई. उन्होंने तत्काल पुलिस से शिकायत की. शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
रेलवे के अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका का संदेह
इस वारदात में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बनाफर 31 अक्टूबर को ही सेवानिवृत्त हुए थे और महज दो दिन बाद साइबर अपराधियों को उनकी मेडिकल कार्ड अपडेट करने की प्रक्रिया का हवाला देकर फोन करने का मौका मिल गया। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि साइबर अपराधियों को रेलवे के सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी पहले से उपलब्ध हो सकती है। इस गिरोह में रेलवे से जुड़े किसी व्यक्ति की भूमिका होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
बताया जाता है कि उम्मीद मेडिकल कार्ड अपडेट करने के नाम पर रेलवे के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई है. कई लोग साइबर अपराधियों के झांसे में आने से बच गए, लेकिन बनाफर को अपनी सेवानिवृत्ति के ठीक बाद जीवनभर की कमाई गंवानी पड़ी. एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में सेंध लगाकर बैंक खातों से रकम उड़ाने का यह कोई पहला मामला नहीं है. इसके बावजूद लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं.
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