रायगड: तीन साल से बिना तनख्वाह काम कर रही क्लर्क, पंडित पाटील ने की SIT जांच की मांग
रोहा के मेहेंदळे हायस्कूल में अनुकंपा पर लगी स्नेहल वाघ को तीन साल से वेतन नहीं मिला। पूर्व विधायक पंडित पाटील ने माध्यमिक शिक्षणाधिकारी महारुद्र नाळे के निलंबन की मांग की है।
रायगड जिले के माध्यमिक शिक्षण विभाग के कामकाज पर सवाल उठे हैं। रोहा के मेहेंदळे हायस्कूल और जूनियर कॉलेज में अनुकंपा के आधार पर जूनियर क्लर्क बनीं स्नेहल गजानन वाघ को पिछले तीन साल से बिना वेतन के काम करना पड़ रहा है। यह स्कूल कोकण एज्युकेशन सोसायटी का है। वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक पंडित पाटील का आरोप है कि विभाग के भ्रष्ट और मनमाने रवैये की वजह से एक गरीब परिवार की इस युवती के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है।
पंडित पाटील ने कहा कि जिले में ऐसी कई गड़बड़ियां हुई हैं। उनकी मांग है कि रायगड जिला परिषद के माध्यमिक शिक्षणाधिकारी महारुद्र नाळे के कार्यकाल में दी गई सारी मंजूरियों और संदिग्ध लेन-देन की नाशिक की तर्ज पर SIT यानी विशेष जांच दल से गहरी जांच कराई जाए। साथ ही नाळे को तुरंत सेवा से निलंबित किया जाए। पाटील का कहना है कि नाशिक और अहिल्यानगर से भी ज्यादा गंभीर और भ्रष्ट कामकाज रायगड के माध्यमिक शिक्षण विभाग में चल रहा है और आम कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है। इस बारे में मुख्यमंत्री और स्कूली शिक्षा मंत्री को विस्तार से निवेदन भेजा गया है।
अब पूरे मामले की कड़ियां देखिए। स्नेहल के पिता गजानन कमळाकर वाघ रोहा के इसी मेहेंदळे हायस्कूल में नौकरी करते थे और सेवा के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी वारिस के तौर पर बेटी स्नेहल की अनुकंपा नियुक्ति की मंजूरी का प्रस्ताव संस्था ने 3 नवंबर 2023 को शिक्षणाधिकारी (माध्यमिक), जिला परिषद रायगड के पास भेजा था। शिक्षणाधिकारी कार्यालय ने 30 अगस्त 2024 को इस नियुक्ति का मंजूरी आदेश जारी किया। इसके बाद 6 मार्च 2025 को माध्यमिक शिक्षणाधिकारी कार्यालय ने स्नेहल वाघ का नाम शालार्थ प्रणाली में जोड़ने का प्रस्ताव मुंबई विभागीय शिक्षा उपसंचालक कार्यालय को भेजा।
पाटील ने कई आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक नौकरी और मंजूरी का लालच देकर शिक्षण विभाग से जुड़े लोगों ने कर्मचारी से पैसों का लेन-देन किया। यह सीधा आरोप है। उनका कहना है कि एक आम और जरूरतमंद परिवार की लड़की तीन साल से एक रुपया भी मानदेय या वेतन पाए बिना काम कर रही है और उसे सिर्फ आश्वासन देकर गुमराह किया गया।
पाटील के अनुसार इस पूरे मामले में विभागीय शिक्षा उपसंचालक से सीधे संपर्क कर उनके पास सामने जाकर शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उपसंचालक कार्यालय ने तकनीकी खामियों और नियमों का हवाला देकर खुलासा मांगा था, मगर शिक्षणाधिकारी ने वह खुलासा साल भर तक लटकाए रखा और बस कागजी घोड़े दौड़ाते रहे।
पाटील का यह भी कहना है कि जवाब मांगने के लिए संपर्क करने पर शिक्षणाधिकारी महारुद्र नाळे जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते और बैठकों में भी नहीं आते।
पंडित पाटील ने अपनी मांग इन शब्दों में रखी है: नियम तोड़कर काम करने वाले और कर्मचारी के भविष्य से खेलने वाले माध्यमिक शिक्षणाधिकारी महारुद्र नाळे की अलग SIT बनाकर जांच की जाए, उन्हें तुरंत सेवा से निलंबित किया जाए, और पीड़ित युवती को बकाया वेतन के साथ सरकार की ऑफलाइन प्रक्रिया के जरिए हमेशा के लिए न्याय दिया जाए।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।