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09:56 IST

राज्यपाल वर्मा बोले, बैंक खाते से आगे बढ़कर सस्ता कर्ज, बीमा और पेंशन भी मिले

मुंबई में एसोचैम की बैंकिंग परिषद में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने ग्रामीण परिवारों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों तक वित्तीय समावेशन पहुंचाने की बात कही।

राज्यपाल वर्मा बोले, बैंक खाते से आगे बढ़कर सस्ता कर्ज, बीमा और पेंशन भी मिले तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि वित्तीय समावेशन सिर्फ बैंक खाते खुलवाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। एसोचैम के नेशनल काउंसिल फॉर बैंकिंग एंड फाइनेंशियल सेक्टर लेंडिंग कंपनीज के 21वें सालाना शिखर सम्मेलन और अवॉर्ड समारोह में वे मुख्य अतिथि थे।

वर्मा ने कहा, "वित्तीय समावेशन सिर्फ बैंक खाते खोलने और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने तक सीमित न रहकर, खासकर ग्रामीण परिवारों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों के लिए किफायती कर्ज, बीमा और पेंशन कवर पक्का करने तक फैलना चाहिए।"

यह परिषद "रेज़िलियंस, रीइन्वेंशन एंड इंडियाज़ राइज़" थीम पर हुई। इसमें भारत की विकास की उम्मीदों को सहारा देने में वित्तीय संस्थाओं की भूमिका पर गहराई से बात हुई।

वहां मौजूद लोगों से बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बैंक और वित्तीय संस्थाएं सिर्फ कर्ज और वित्तीय सेवाएं देने वाली नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अहम साझेदार हैं। उनके मुताबिक टेक्नोलॉजी बैंकिंग को नया रूप दे रही है, ऐसे में एक स्थिर, नए ढंग की और सबको साथ लेकर चलने वाली वित्तीय व्यवस्था बनानी चाहिए। इसमें कर्ज उत्पादक क्षेत्रों तक पहुंचे, टेक्नोलॉजी जनता की सेवा करे और वित्तीय मौके समाज के हर तबके तक पहुंचें।

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अतुल कुमार गोयल ने भारत की लंबे समय की आर्थिक उम्मीदों में बैंकिंग क्षेत्र के योगदान पर बात की। उन्होंने कहा, "2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना पूरा करने के लिए भारत का बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र मुख्य उत्प्रेरक बन सकता है।" गोयल के मुताबिक इस क्षेत्र को आर्थिक विकास के मौके खोलने, उत्पादकता बढ़ाने, डिजिटल परिपक्वता हासिल करने और मजबूती बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और एमएसएमई जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए वित्तपोषण मजबूत करना, एआई का इस्तेमाल करना और साइबर सुरक्षा को शामिल करना इस सफर के लिए बेहद जरूरी होगा।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने सुशासन की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत जब विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है, तब सबको साथ लेकर चलने वाला और टिकाऊ विकास पक्का करते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई की बढ़त, मैन्युफैक्चरिंग, हाउसिंग, खेती और नए उद्योगों को सहारा देने में वित्तीय संस्थाओं की बड़ी भूमिका होगी। मिंडा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन, फिनटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में भरोसा, पारदर्शिता, मजबूत सुशासन, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार कर्ज बांटना ही वित्तीय व्यवस्था के आधार स्तंभ रहने चाहिए।

एसोचैम नेशनल काउंसिल फॉर बैंकिंग के सह-अध्यक्ष और येस बैंक के कार्यकारी निदेशक मनिष जैन ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर को पैसा देने, एमएसएमई को मजबूत करने और ऊर्जा बदलाव को सहारा देने में वित्तीय क्षेत्र की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि एडवांस्ड डिजिटल अंडरराइटिंग, इकोसिस्टम पर आधारित फाइनेंसिंग मॉडल और वैश्विक वैल्यू चेन में छोटे कारोबारों को ज्यादा जोड़कर एमएसएमई क्षेत्र में 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की क्रेडिट कमी भरना सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।

परिषद में एसोचैम ईवाय नॉलेज रिपोर्ट जारी की गई। एक खास सत्र में बैंकिंग और वित्तीय कर्ज सप्लाई क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली संस्थाओं और दिग्गजों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम के आखिर में एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने आभार जताया और सरकार, नियामकों और उद्योग जगत के बीच सहयोग की अहमियत पर जोर दिया।

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