चुनाव आयोग में अंदरूनी तनाव: दो आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्ति, राज ठाकरे का निशाना
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच मतभेद सामने आने के बाद मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
केंद्रीय चुनाव आयोग के भीतर चल रहा अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और बाकी दो आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, के बीच तनाव की खबरें चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे पर पिछले 10 महीनों में इन दोनों आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कई फैसलों पर कुल 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, जिसके चलते तीनों के बीच का यह विवाद अब सार्वजनिक हो गया है।
नए मतदाता पंजीकरण कार्यक्रम के दौरान संधू और जोशी को कई फैसलों की जानकारी ही नहीं दी गई, ऐसा कहा जा रहा है। इसी वजह से इन दोनों आयुक्तों ने कई निर्णयों पर सवाल खड़े किए थे। यह भी बताया जा रहा है कि इन्होंने इस बारे में सीधे कैबिनेट सचिव से भी शिकायत की थी। हालांकि चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। दूसरी तरफ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दल इस मुद्दे पर आक्रामक हो गए हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए चुनाव आयोग पर निशाना साधा। एक्स (ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में राज ठाकरे ने लिखा कि इस खबर ने देश में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि 2025 के अंत में, महानगरपालिका चुनावों से पहले जब वे और महाराष्ट्र के विपक्षी नेता राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त और उनके सहयोगियों से मिलते थे, तभी उन्हें अंदाजा हो गया था कि इनके पास कोई असली अधिकार ही नहीं हैं। राज ठाकरे ने कहा कि यह बात उन्होंने और उनकी पार्टी ने कई बार सार्वजनिक रूप से कही है, चाहे उसे शक कहें या आरोप, और अब इस खबर में उनकी बातों की सच्चाई मिल जाएगी।
राज ठाकरे ने आगे लिखा कि राज्य चुनाव आयोग की बात तो छोड़िए, जहां केंद्रीय चुनाव आयोग के दो आयुक्तों को ही दरकिनार कर उन्हें अंधेरे में रखकर या उनकी राय की कोई कीमत न देकर फैसले लागू किए जा रहे हैं, वहां एक बात साफ है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता अब सिर्फ किताबों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि अगर स्वायत्तता की परिभाषा भारतीय जनता पक्ष के अधीन रहना है, तभी वह स्वायत्त है, वरना नहीं। राज ठाकरे ने कहा कि आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने जो आपत्तियां दर्ज कराई हैं वे गंभीर हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए इन्हें नकारना मुमकिन ही नहीं है, इसलिए यह पूछना ही काफी है कि उनके इस रवैये के पीछे असली सूत्रधार कौन है।
राज ठाकरे ने यह भी लिखा कि इस खबर की लिंक वे जानबूझकर दे रहे हैं और हर भारतीय नागरिक को समय निकालकर इसे जरूर पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग वोट डालते हैं और बदलाव चाहते हैं, लेकिन वह बदलाव कभी क्यों नहीं मिलता, इसका जवाब इस खबर में मिल जाएगा।
राज ठाकरे के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के कामकाज पर रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई, फिर भी चुनाव आयोग ने जो करना था वही किया। उन्होंने बताया कि फिलहाल चुनाव आयोग में कुल तीन आयुक्त हैं, एक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, और दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी। इनमें से दो ने आपत्ति दर्ज कराई है, जिससे यह तस्वीर बनती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मनमाने ढंग से फैसले ले रहे थे। लेकिन राज ठाकरे का कहना है कि असल में उनसे ये फैसले करवाए जा रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति फरवरी 2025 में हुई थी, यानी आते ही उन्होंने अपने बॉस को खुश करना शुरू कर दिया।
दूसरे दो आयुक्तों ने जो आपत्तियां दर्ज कराईं, उनमें मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर से जुड़े कुछ आदेश आयोग की मंजूरी के बिना जारी होने की बात लिखित में कही गई है। 'फॉर्म 6' (एसआईआर) में आवेदक या उसके परिवार का नाम पिछले एसआईआर में था या नहीं, यह पूछा गया, जबकि इन दोनों आयुक्तों का कहना था कि यह पूछने का अधिकार आयोग के पास नहीं है और इसके लिए कानून में बदलाव करना होगा। स्थानीय चुनाव पंजीकरण अधिकारियों की सूची में बदलाव करने या न करने की शक्ति लगभग खत्म कर दी गई और सॉफ्टवेयर में उन्हें लगभग कोई अधिकार नहीं बचा। गोवा में स्थानीय अधिकारियों ने कागजात जांचकर 97 लोगों को पात्र माना था, लेकिन सॉफ्टवेयर में समय पर उनके नाम दोबारा शामिल करने की सुविधा न मिलने से अंतिम सूची में उनके नाम नहीं आ सके।