पुरखों की जमीन अपने नाम कैसे कराएं, जानिए म्यूटेशन की पूरी प्रक्रिया और जरूरी कागज
वारिसाना हक से मिली पुरखों की जमीन या घर को रेवेन्यू रिकॉर्ड में अपने नाम कराने के लिए तहसीलदार के पास अर्ज देना होता है। जानिए कौन से कागज लगते हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अगर आपको परदादा या पिता से पुरखों की जमीन या घर मिला है, तो उस पर अपना हक कैसे दर्ज कराएं, यह सवाल कई परिवारों के सामने आता है। भारत में बहुत से परिवार ऐसे हैं जिन्हें वारिसाना हक से बाप-दादा की प्रॉपर्टी मिल जाती है, लेकिन उन्होंने रेवेन्यू रिकॉर्ड में अपना नाम चढ़वाया नहीं होता।
दिक्कत तब आती है जब प्रॉपर्टी बेचनी हो, हिस्सा-बंटवारा करना हो या उसी जमीन पर कर्ज लेना हो। ऐसे में पहले रिकॉर्ड में जो भी जानकारी दर्ज है, उसे और उससे जुड़े कागजों को अच्छी तरह जांच लें। उसके बाद जमीन अपने नाम कराने के लिए अर्ज दें।
अगर भूमि अभिलेखों में बुजुर्गों के नाम दर्ज हैं और आपके दादा या पिता का निधन हो चुका है, तो आप अपना नाम दर्ज कराने के लिए अर्ज कर सकते हैं।
जमाबंदी क्या होती है, यह भी समझ लें। जमीन से जुड़े रेवेन्यू दस्तावेजों को जमाबंदी कहा जाता है। इसमें जमीन के मालिक या जिसके कब्जे में जमीन है उसकी जानकारी, जमीन का ब्योरा, खेती या किराए जैसी बातें हो सकती हैं। अलग-अलग राज्यों में जमीन के रिकॉर्ड अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं। महाराष्ट्र में इसे 7/12 कहा जाता है।
INBA की दी जानकारी के मुताबिक, जिसके नाम पर जमीन है उसका मृत्युपत्र यानी वसीयत जरूरी है। साथ में तहसीलदार को अर्ज देना होता है और जरूरत हो तो प्रतिज्ञापत्र यानी एफिडेविट भी बनवा लें। इससे जुड़ी एंट्रियां आप भारत सरकार के वेब पोर्टल पर भी देख सकते हैं। परिवार के बाकी सदस्यों के आधार कार्ड लेकर कागजों की जांच करवा लें। इसके बाद नाम बदलवाने की प्रक्रिया शुरू करें। इस प्रक्रिया को दाखिल-खारिज या म्यूटेशन कहा जाता है।
अगर आप जमीन के कानूनी वारिस हैं, तो रेवेन्यू रिकॉर्ड में नाम बदलवाने के लिए आसानी से अर्ज कर सकते हैं। अगर परिवार में जमीन का आपस में बंटवारा हो चुका है या कोई वैध वसीयत बनी है, तो प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया के लिए संबंधित बंटवारा-पत्र, वसीयत या दूसरे कागज जमा करने को कहा जा सकता है। वहीं, अगर परिवार के दूसरे वारिसों को उस जमीन पर एतराज है या वे बंटवारे पर राजी नहीं हैं, तो मामले की गहरी जांच या सही कानूनी कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है।
जरूरी कागजों की सूची इस तरह है:
रजिस्टर्ड मालिक की जानकारी वाली जमाबंदी या जमीन के कागज। पुराने मालिकाना कागज, जिनसे पता चले कि जमीन किसकी है और कैसे मिली। पिछले मालिक की वसीयत। कानूनी वारिस होने का सबूत। पहचान पत्र और पते का सबूत। अगर जमीन पर दावा वसीयत या बंटवारे के आधार पर है, तो उससे जुड़े कागज। और जमीन की एंट्री में नाम बदलवाने के लिए दाखिल-खारिज का अर्ज और फीस की रसीद।