पीएम मोदी के दिवंगत पिता पर खरगे की टिप्पणी, श्रीकांत शिंदे ने कांग्रेस को घेरा
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी का कड़ा विरोध किया और गांधी परिवार की चुप्पी पर सवाल उठाया।
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर एक टिप्पणी की है। इस पर विवाद खड़ा हो गया है और राजनीतिक माहौल गरम है। शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस बयान का कड़ा विरोध किया है।
शिंदे का कहना है कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है। लेकिन विरोध के नाम पर निजी स्तर पर उतरकर अपमानजनक भाषा बोलना लोकतांत्रिक परंपरा के हिसाब से ठीक नहीं है। उन्होंने इसी बात पर कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल खड़े किए। साथ ही उन्होंने सीधे पूछा कि इस बयान पर गांधी परिवार चुप क्यों है।
शिंदे ने अपनी बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर रखी। वहां उन्होंने खरगे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक राजनीति में विचारों की लड़ाई और नीतियों की आलोचना की आज़ादी है। मगर इसके लिए शालीनता, संयम और इंसानी संवेदनशीलता की हदें पार करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी नेता के दिवंगत माता-पिता को निशाना बनाना राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि निजी अपमान की मिसाल है।
शिंदे ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी देश की जनता के जनादेश से सबसे ऊंचे संवैधानिक पद पर पहुंचे हैं। इसलिए उन पर टीका करते वक्त प्रधानमंत्री पद की गरिमा और लोकतंत्र की तय की हुई हदों का ध्यान रखना ज़रूरी है। राजनीतिक विरोधियों से मतभेद हो सकते हैं, पर वे मतभेद निजी नफरत में नहीं बदलने चाहिए। शिंदे के मुताबिक सार्वजनिक जीवन में सोच-समझकर बयान देना हर नेता की ज़िम्मेदारी है।
कांग्रेस के बड़े नेतृत्व को इस बयान पर साफ रुख रखना चाहिए, ऐसा कहते हुए शिंदे ने गांधी परिवार की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि लोकतंत्र की हदें लांघने वाले बयान पर कांग्रेस का नेतृत्व खामोश क्यों है। उनका कहना था कि इस मामले में कांग्रेस को आत्मपरीक्षण करना चाहिए।
शिंदे ने आखिर में कहा कि अपनी असहमति जताते वक्त भाषा का स्तर और सार्वजनिक जीवन की शालीनता बनी रहनी चाहिए। निजी आलोचना की जगह जनता के सवालों पर चर्चा होनी चाहिए, यही उम्मीद की जाती है।
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