लातूर: अंकुलगा राणी के 28 साल के किसान ने 6 लाख 20 हजार के कर्ज से तंग आकर जान दी
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शिरूर अनंतपाल तालुका के किसान दत्ता कुंभार पर प्राइवेट फायनेंस कंपनियों का कर्ज था। गाँव वाले परिवार के लिए फौरन आर्थिक मदद माँग रहे हैं।
लातूर जिले के शिरूर अनंतपाल तालुका के अंकुलगा राणी गाँव से एक दुखद खबर आई है। गाँव के 28 साल के किसान दत्ता सूर्यकांत कुंभार ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और किसानों में गुस्सा भी है और गम भी।
मिली जानकारी के मुताबिक खेती में हुए नुकसान और लगातार फसल न होने की वजह से दत्ता कुंभार आर्थिक तंगी में फँस गए थे। उन पर प्राइवेट फायनेंस कंपनियों का कुल 6 लाख 20 हजार रुपये का कर्ज था। कर्ज का बोझ और उसे चुकाने का दबाव उन्हें कई दिनों से बहुत परेशान कर रहा था। इसी तनाव और निराशा में उन्होंने यह आखिरी कदम उठा लिया।
आत्महत्या से पहले दत्ता ने एक सुसाइड नोट लिखकर छोड़ा। इस नोट में उन्होंने कर्ज की वजह से आई बेबसी का जिक्र किया है और अपने परिवार की फिक्र भी जताई है। उनके ये आखिरी शब्द पढ़ने वालों को अंदर तक झकझोर रहे हैं।
दत्ता के पीछे उनकी बुजुर्ग माँ, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। घर के कमाने वाले के चले जाने से कुंभार परिवार पर मानो पहाड़ टूट पड़ा है और पूरा परिवार बेसहारा हो गया है।
इस घटना से किसानों की आत्महत्या का सवाल फिर सामने आ गया है। खबर के मुताबिक मराठवाड़ा में सूखे जैसे हालात हैं, कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और सरकारी मदद की कमी है, जिससे अन्नदाता परेशान है। एक नौजवान किसान ने जिंदगी की शुरुआत में ही दुनिया छोड़ दी, इसलिए प्रशासन और सरकार की नीतियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गाँव वाले माँग कर रहे हैं कि इस दुखी और बेसहारा परिवार को फौरन आर्थिक मदद दी जाए।
महाराष्ट्र में कम बारिश और मौसम में बदलाव की वजह से सूखे जैसी स्थिति गंभीर होती जा रही है। मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र के कई जिलों में पानी की भारी कमी हो गई है। कुओं और बोरवेल का जलस्तर काफी नीचे चला गया है और कई जगह टैंकर से पानी पहुँचाना पड़ रहा है।
पानी न होने से खेती को भारी नुकसान हुआ है और फसलें झुलस गई हैं। इससे किसान बड़ी आर्थिक मुश्किल में हैं। जानवरों के चारे और पीने के पानी का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सूखे से निपटने के लिए सरकार से टैंकरों की संख्या बढ़ाने, छावनियाँ लगाने और पानी की किल्लत दूर करने के लिए फौरन कदम उठाने की माँग हो रही है।
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