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रविवार, 8 नवंबर 2026

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न्यूजीलैंड चुनाव: लक्सन की गठबंधन बहुमत के करीब, 14 प्रतिशत वोटों की गिनती बाकी

न्यूजीलैंड चुनाव: लक्सन की गठबंधन बहुमत के करीब, 14 प्रतिशत वोटों की गिनती बाकी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

न्यूजीलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का गठबंधन 131 सदस्यों की संसद में 67 सीटों तक पहुंचता दिख रहा है, पर 14 प्रतिशत विशेष वोट बाकी हैं। अंतिम नतीजा 27 नवंबर को आएगा।

न्यूजीलैंड में हुए आम चुनाव के नतीजे बेहद कांटे के मोड़ पर पहुंच गए हैं। मौजूदा प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन (Christopher Luxon) और उनके सहयोगी दलों का गठबंधन बहुमत के बिल्कुल करीब है। शुरुआती आंकड़ों में सत्ताधारी दलों को जरूरी संख्या मिलती दिख रही है, फिर भी देश में नई सरकार फौरन नहीं बन सकती। सबसे बड़ी वजह यह है कि करीब 14 प्रतिशत वोटों की गिनती अभी बाकी है। चुनाव आयोग की अंतिम तस्वीर साफ होने तक नई सरकार का भविष्य अधर में है, और सरकार बनने में कुछ हफ्ते और लग सकते हैं।

न्यूजीलैंड चुनाव आयोग के शुरुआती नतीजों के मुताबिक लक्सन की नेशनल पार्टी (National Party) और उसके सहयोगी दल एसीटी (ACT) और न्यूजीलैंड फर्स्ट (NZ First) 131 सदस्यों वाली संसद में 67 सीटों तक पहुंचते दिख रहे हैं। साफ बहुमत के लिए 66 सीटें चाहिए। यानी मौजूदा तस्वीर में गठबंधन के पास सिर्फ एक सीट का बहुत नाजुक बहुमत है।

असली पेच गिनती के आखिरी दौर में है। कुल वोटों में से करीब 14 प्रतिशत "विशेष वोट" (Special Votes) की श्रेणी में आते हैं। इनमें विदेश में रहने वाले न्यूजीलैंड के नागरिकों के वोट और वे वोट शामिल होते हैं जो लोगों ने अपने चुनाव क्षेत्र से बाहर जाकर डाले। न्यूजीलैंड की राजनीति के इतिहास में अनुभव रहा है कि ये डाक या विशेष वोट अक्सर वामपंथी सोच वाले दलों, जैसे लेबर और ग्रीन पार्टी, की तरफ झुकते हैं। अगर इन वोटों से लक्सन के गठबंधन की एक भी सीट घटी, तो उनका बहुमत खतरे में पड़ सकता है। चुनाव आयोग 27 नवंबर को अंतिम आधिकारिक नतीजा घोषित करेगा। तब तक लक्सन को "कार्यवाहक प्रधानमंत्री" (Caretaker Prime Minister) के तौर पर ही काम देखना होगा।

इन नतीजों के बीच मध्यमार्गी सोच वाली द अपॉर्च्युनिटीज पार्टी (The Opportunities Party) अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई है। अगर 27 नवंबर के अंतिम नतीजे में लक्सन के गठबंधन का बहुमत फिसल गया, तो सरकार बनाने में इस पार्टी की भूमिका बहुत अहम होगी। यह पार्टी पहली बार संसद में पहुंच रही है, और उसका रुख अगला प्रधानमंत्री तय कर सकता है।

खास बात यह है कि चुनाव से पहले प्रधानमंत्री लक्सन ने इस पार्टी के साथ किसी भी तरह के गठजोड़ से साफ इनकार किया था। लेकिन बदले हुए समीकरणों के बाद उन्होंने अपने रुख में लचीलापन दिखाया है। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र की वरिष्ठ प्रोफेसर मोना क्रेवेल के मुताबिक अपॉर्च्युनिटीज पार्टी बेहद व्यावहारिक और बीच का रास्ता लेने वाली है, इसलिए सत्ता की राह आसान करने के लिए लक्सन या विपक्षी लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिन्स (Chris Hipkins) इस पार्टी से हाथ मिला सकते हैं।

यह चुनाव 1996 में लागू मिश्रित सदस्य आनुपातिक (MMP) चुनाव प्रणाली के बाद का सबसे अनोखा चुनाव बताया गया है। इस प्रणाली में मतदाता दो वोट देते हैं, एक पार्टी को और एक स्थानीय उम्मीदवार को। संसद की 71 सीटें सीधे चुनाव क्षेत्रों से तय होती हैं और 60 सीटें पार्टियों को मिले कुल वोटों के हिसाब से। इस बार के चुनाव में जनता और मतदाताओं की गहरी निराशा दिखी है। देश की दो मुख्य पार्टियों, नेशनल पार्टी और लेबर पार्टी, दोनों को कुल वोटों के 30 प्रतिशत से कम वोट मिले हैं। 1996 के बाद इन दोनों बड़ी पार्टियों का यह अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक बेन थॉमस के मुताबिक जनता ने सुस्त अर्थव्यवस्था, आसमान छूती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर स्थापित पार्टियों को जोरदार झटका दिया है। नेशनल पार्टी को मिले कम वोट प्रतिशत की वजह से मौजूदा वित्त मंत्री निकोला विलिस (Nicola Willis) समेत कई दिग्गज नेताओं को अगली संसद में अपनी जगह गंवाने का डर पैदा हो गया है।

नतीजों पर नेशनल पार्टी के वरिष्ठ नेता साइमन ब्राउन ने कहा, "ये नतीजे हमारे लिए जितने खुशी देने वाले हैं, उतने ही कुछ मामलों में निराशाजनक भी हैं।" न्यूजीलैंड का अगला कामकाज कौन संभालेगा, इसका फैसला अब 27 नवंबर की अंतिम गिनती के बाद ही साफ होगा।

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