मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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नीर कैसर की पसंद: अगले 5 साल के लिए शेयर बाजार सोने और बिटकॉइन से आगे

नीर कैसर की पसंद: अगले 5 साल के लिए शेयर बाजार सोने और बिटकॉइन से आगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

मार्केट्स कॉलमिस्ट नीर कैसर ने अलग-अलग एसेट क्लास के बीच मुकाबला कराया और आखिर में शेयर बाजार को चुना। उन्होंने साफ किया कि यह उनकी निजी पसंद है, निवेश सलाह नहीं।

अगले 5 साल के लिए पैसा कहां लगाया जाए, यह सवाल आम निवेशक से लेकर अमीर आदमी तक हर किसी के सामने खड़ा रहता है। सोना लें, बिटकॉइन लें, सरकारी बॉन्ड लें, रियल एस्टेट में जाएं या सीधे शेयर बाजार में उतरें। हर कोई इसका जवाब ढूंढता है और बाजार के जानकार अपने-अपने तजुर्बे के हिसाब से अलग-अलग सलाह देते रहते हैं।

इसी सवाल का जवाब मार्केट्स कॉलमिस्ट और यूनिसन एडवाइजर्स के संस्थापक नीर कैसर ने एक खास विश्लेषण में दिलचस्प तरीके से तलाशा। उन्होंने अलग-अलग एसेट क्लास के बीच एक तरह का टूर्नामेंट कराया। इस मुकाबले के आखिर में उन्होंने शेयर बाजार को सबसे बढ़िया विकल्प बताया।

शुरुआत उन्होंने पुराने और नए जमाने की संपत्तियों की तुलना से की। पहले राउंड में बॉन्ड और सोना आमने-सामने थे। कैसर के मुताबिक बॉन्ड वाला विकल्प बहुत बोरिंग है, जबकि सोने में ज्यादा कशिश है। इसलिए उन्होंने बॉन्ड की जगह सोने को चुना।

इसके बाद कैश और बिटकॉइन की बारी आई। कैसर के लिए यह फैसला थोड़ा मुश्किल था, लेकिन नकद पैसा पड़ा रखने में उनकी खास दिलचस्पी नहीं है। इसलिए उन्होंने कैश को किनारे कर क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन को आगे बढ़ा दिया। हालांकि ऐसा करते हुए उन्होंने बिटकॉइन के भविष्य के किसी खास रिटर्न का टारगेट या कीमत का अंदाजा नहीं बताया।

अगले दौर में शेयर और प्राइवेट इक्विटी निवेश का मुकाबला हुआ और कैसर ने शेयर बाजार को चुना। प्राइवेट इक्विटी को लेकर उन्होंने पारदर्शिता का मुद्दा उठाया। उनकी राय है कि ऐसे निवेश में असल में क्या हो रहा है, पैसे का इस्तेमाल कैसे हो रहा है और कंपनियों की माली हालत कैसी है, इसकी साफ जानकारी निवेशकों को आसानी से नहीं मिलती। साथ ही, प्राइवेट इक्विटी में जो रिटर्न के आंकड़े बताए जाते हैं, वे कितने भरोसेमंद हैं, इस पर भी उन्होंने शक जताया। उनके मुताबिक शेयर बाजार में कंपनियों की वित्तीय जानकारी, कामकाज और लेनदेन के ब्योरे तुलनात्मक रूप से आसानी से मिल जाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शेयर बाजार का हर निवेश सुरक्षित या फायदे वाला होता है।

जब सोने और बिटकॉइन का सीधा मुकाबला हुआ, तो कैसर ने सोना चुना। दोनों को वैल्यू सहेजकर रखने का जरिया माना जा सकता है। फिर भी उन्होंने सोने की एक अलग खूबी गिनाई। सोना ऐसी चीज है जिसे हाथ में लिया जा सकता है, जबकि बिटकॉइन पूरी तरह डिजिटल करेंसी है। सोने की परंपरा कई साल पुरानी है और अलग-अलग देशों के निवेशक उसे कीमती संपत्ति मानते हैं। बिटकॉइन की कीमत मुख्य रूप से बाजार की मांग, सप्लाई और निवेशकों की उम्मीदों पर टिकी रहती है। कैसर की यह पसंद उनकी निजी पसंद पर आधारित है। इससे यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि बिटकॉइन आगे कम रिटर्न देगा।

फाइनल में स्टॉक्स, ऑइल और सोने के बीच जोरदार मुकाबला हुआ और शेयर बाजार ने बाजी मारकर पहला नंबर हासिल किया। कैसर ने वजह बताई कि शेयर बाजार में पैसा लगाने से निवेशक को सीधे कई अच्छी और मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में हिस्सेदारी मिलती है। इसके लिए अलग-अलग कंपनियां खोजने की जरूरत नहीं, एक अच्छा इंडेक्स फंड खरीद लेना भी काफी हो सकता है। उलटे सोना जैसा विकल्प एक ही कमोडिटी पर टिका रहता है। शेयर बाजार निवेशक को एक ही कारोबार या कमोडिटी पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना अर्थव्यवस्था के कई उद्योगों की बढ़त में हिस्सेदार बनने का मौका देता है।

शेयर बाजार को चुनने के बावजूद कैसर ने किसी खास कंपनी के शेयर खरीदने की सलाह नहीं दी है। कौन सा इंडेक्स फंड लेना है, कुल निवेश का कितना हिस्सा शेयरों में रखना है या अगले 5 साल में कितना रिटर्न मिलेगा, इस बारे में भी उन्होंने कोई तय हिसाब नहीं रखा। उनकी पसंद अलग-अलग एसेट क्लास के बीच सिर्फ निजी पसंद है और इसे निवेश सलाह की तरह नहीं देखना चाहिए।

शेयर बाजार में पैसा लगाते वक्त जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है। पांच साल जैसी छोटी या मध्यम अवधि में भी शेयर बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव दिख सकते हैं। फिर भी विश्लेषण का मुख्य संदेश यही है कि अगर किसी निवेशक को अगले 5 साल के लिए सिर्फ एक एसेट क्लास चुननी हो, तो कैसर कई अच्छी कंपनियों में मालिकाना हक दिलाने वाले शेयर बाजार को पहली पसंद बनाएंगे। उनकी तुलना में शेयर बाजार ने सोना, बिटकॉइन, बॉन्ड, कैश, प्राइवेट इक्विटी और तेल सबको पीछे छोड़ा।

हर निवेशक का आर्थिक लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि अलग होती है, इसलिए एक जानकार की पसंद सबके लिए सही हो, यह जरूरी नहीं। अगले 5 साल के लिए निवेश करते समय अलग-अलग विकल्पों की जानकारी लेना, जोखिम समझना और जरूरत पड़े तो वित्तीय सलाहकार की मदद लेना अहम है। सबसे ज्यादा रिटर्न की उम्मीद से ज्यादा जरूरी है कि निवेश आपके आर्थिक लक्ष्यों के मुताबिक और सोच-समझकर बनाया गया हो।

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