नेवासा की पानी योजनाएं जल्द पूरी हों, टैंकर आखिरी विकल्प: गुलाबराव पाटील
पानी आपूर्ति और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील ने मंत्रालय की बैठक में अधूरी योजनाएं तुरंत पूरी करने और टैंकर पर निर्भरता घटाने के निर्देश दिए।
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पानी की किल्लत को देखते हुए पानी आपूर्ति और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील ने निर्देश दिए हैं कि पानी आपूर्ति योजनाओं के अधूरे काम तुरंत पूरे किए जाएं और योजनाएं चालू की जाएं। उनका कहना है कि टैंकर से पानी पहुंचाना पहला विकल्प नहीं, बल्कि आखिरी विकल्प होना चाहिए। इसके लिए मौजूद जल स्रोतों का अच्छी तरह इस्तेमाल करके लोगों को नियमित पानी देने की योजना बनाई जाए।
मंत्रालय में पानी की किल्लत को लेकर नेवासा विधानसभा क्षेत्र की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में नेवासा के विधायक विठ्ठलराव लंघे और पानी आपूर्ति विभाग के संबंधित अधिकारी मौजूद थे। अहिल्यानगर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संबंधित अधिकारी वीडियो के जरिए बैठक से जुड़े।
गुलाबराव पाटील ने कहा कि जिन योजनाओं का काम 75 से 99 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, उनमें बिजली कनेक्शन, पाइपलाइन जोड़ने, छोटी-मोटी मरम्मत और पैसे की कमी से रुके काम तुरंत निपटाए जाएं। अगर नियमित फंड मिलने में देरी हो रही हो, तो जरूरत के हिसाब से किल्लत निवारण योजना (scarcity relief plan) से पैसा देकर ये काम आगे बढ़ाए जाएं। उनके मुताबिक इससे योजनाएं जल्दी चालू होंगी और टैंकर पर निर्भरता कम होगी।
नेवासा विधानसभा क्षेत्र की योजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि 18 योजनाएं अटकी हुई हैं। इनमें से 16 रेट्रोफिटिंग योजनाओं का काम पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही संबंधित अधिकारियों से कहा गया कि बाकी काम युद्धस्तर पर निपटाने के लिए समय-सीमा तय करके योजना बनाएं, ताकि दिसंबर या जनवरी तक गांवों में नियमित पानी आपूर्ति शुरू हो सके।
टैंकर से पानी देने में पारदर्शिता रखना और गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म करना जरूरी बताया गया। इसके लिए बैठक में टैंकर के फेरों की एंट्री, असल में दिए गए पानी और उसके बंटवारे पर नजर रखने वाला डिजिटल ट्रैकिंग ऐप सिस्टम लागू करने पर जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि टैंकर सिर्फ असली जरूरत के हिसाब से ही लगाए जाएं।
पानी की किल्लत के दौरान सीधे टैंकर शुरू करने के बजाय दूसरे उपायों को प्राथमिकता देने को कहा गया है। इनमें जरूरत के मुताबिक कुओं का अधिग्रहण, अस्थायी नल योजनाएं और पाइपलाइन का काम, कुओं को गहरा करना, गाद निकालना और आड़े बोर लेना शामिल हैं। मंत्री गुलाबराव पाटील ने कहा कि मौजूद पानी के स्रोतों का सही इस्तेमाल करके किल्लत वाले गांवों को टिकाऊ और नियमित पानी देने के लिए संबंधित विभाग आपस में तालमेल से काम करें।