गणपति विसर्जन के बाद पीछे मुड़कर न देखने की प्रथा क्यों निभाई जाती है, जानिए वजह
बाप्पा को विदाई देते वक्त पीछे मुड़कर न देखने की जो परंपरा है, उसके पीछे की वजह क्या है, यह जानना जरूरी है।
बाप्पा जब घर में आते हैं तो घर में कितनी खुशी होती है। ढोल-ताशे, आरती, मोदक, सब कुछ भरा-भरा सा लगता है। लेकिन जैसे-जैसे विसर्जन का दिन नजदीक आता है, मन भारी होने लगता है। डेढ़ दिन, पांच दिन, सात दिन या दस दिन बाप्पा अपने घर में रहते हैं और फिर उन्हें विदाई देनी पड़ती है। यह पल सच में बहुत भावुक करने वाला होता है।
हर घर में विसर्जन करने का तरीका अलग-अलग होता है। कोई उत्तरपूजा करता है, कोई आरती करता है, नैवेद्य दिखाता है, अक्षत चढ़ाता है और फिर "गणपती बाप्पा मोरया, अगले साल जल्दी आ" का जयघोष करते हुए बाप्पा को विदाई दी जाती है।
लेकिन विसर्जन के वक्त एक सवाल सबके मन में आता है, बाप्पा का विसर्जन करने के बाद पीछे मुड़कर देखना चाहिए या नहीं? बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि विसर्जन हो जाने के बाद पीछे मुड़कर मत देखो। लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है? इसके पीछे कोई शास्त्रीय आधार है या यह सिर्फ एक मान्यता है, आइए यह जानते हैं।
पीछे मुड़कर न देखने के पीछे सबसे पहली और सबसे बड़ी वजह भावनात्मक है। बाप्पा 10 दिन अपने घर में रहते हैं। हम रोज उनकी पूजा करते हैं, उनसे बातें करते हैं। वे घर के ही एक सदस्य जैसे बन जाते हैं। उन्हें पानी में विदाई देते वक्त मन में बहुत बुरा लगता है। अगर विसर्जन के बाद हम पीछे मुड़कर देखें तो वह मोह छूट नहीं पाता। मन में बार-बार लगता रहता है कि बाप्पा को थोड़ी देर और रोक लें।
इसीलिए बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि एक बार विदाई दे दी तो पीछे मत देखो, मोह में मत फंसो। बाप्पा जा चुके हैं यह बात मन को समझा दो और अगले साल वे फिर आएंगे, इसी खुशी के साथ घर जाओ।
दूसरी एक मान्यता यह है कि बाप्पा जाते वक्त घर का दुख, दिक्कतें, संकट सब कुछ अपने साथ ले जाते हैं। वे विघ्नहर्ता हैं और हमारे सारे विघ्न दूर करते हैं। माना जाता है कि अगर विसर्जन के बाद पीछे मुड़कर देखा तो हम उन दुखों को वापस बुला लेते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि बाप्पा के जाने के बाद पीछे मत देखो, सीधे घर चले जाओ, ताकि घर की नकारात्मकता भी उनके साथ चली जाए और नई उम्मीद लेकर आप घर लौटें।
सच कहा जाए तो किसी भी बड़े ग्रंथ में ऐसा नहीं लिखा है कि पीछे मुड़कर देखने से पाप लगेगा या दोष लगेगा। यह कोई नियम नहीं है, यह एक लोकपरंपरा है, पहले से चली आ रही एक प्रथा है। जैसे हम किसी मेहमान को स्टेशन पर छोड़ने जाते हैं और उनके जाने के बाद ज्यादा देर वहां खड़े नहीं रहते, वैसा ही यह है। एक बार विदाई दे दी तो बात खत्म, मन में बार-बार उसी की सोच लेकर मत बैठो।
तो फिर करना क्या चाहिए? विसर्जन के दिन बाप्पा की मनोभाव से उत्तरपूजा करें। उन्हें पसंद आने वाला नैवेद्य दिखाएं, आरती करें। विसर्जन के वक्त "अगले साल जल्दी आ" दिल से बोलें। बाप्पा को पानी में विसर्जित करने के बाद नमस्कार करें और पीछे मुड़े बिना घर आ जाएं। घर आकर हाथ-पैर धो लें और घर की थोड़ी सफाई करें। माना जाता है कि बाप्पा के जाने के बाद घर में फिर से सकारात्मकता आती है।
आखिर में बात यह है कि यह पूरी तरह श्रद्धा का विषय है। पीछे मुड़कर देखने या न देखने से बाप्पा नाराज नहीं होते, वे तो अपने लाडले हैं। जरूरी बात यह है कि विदाई देते वक्त मन में भाव होना चाहिए। बाप्पा जाते वक्त अगले साल जल्दी आने का वचन लेकर जाते हैं, यही सोच मन में रखनी चाहिए।