नागपुर सुधार प्रन्यास में पदोन्नति अटकी, पात्र कर्मचारियों ने जताई नाराज़गी
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नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) के अधिकारियों और कर्मचारियों में पदोन्नति और पोस्टिंग में हो रही देरी को लेकर नाराज़गी बढ़ती जा रही है। बताया गया है कि कुछ मामलों में पदोन्नति तो दे दी गई, लेकिन कर्मचारियों को नई पोस्ट नहीं सौंपी गई। कई पदोन्नति प्रस्ताव भी अब तक अटके पड़े हैं। अतिरिक्त जिम्मेदारियां बांटने में कथित गड़बड़ियों से प्रशासन के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतें NIT के चेयरमैन संजय मीणा के कार्यकाल में लिए गए प्रशासनिक फैसलों को लेकर हैं। खासकर पदोन्नति लागू करने और ऊंची जिम्मेदारियां देने के तरीके पर आपत्ति जताई गई है।
नवंबर 2025 में जूनियर इंजीनियर के पद पर पदोन्नत हुए कर्मचारियों को आरोप है कि अब तक नए पद पर जॉइन नहीं करने दिया गया। पदोन्नति मिलने के बावजूद वे अभी सिविल इंजीनियरिंग असिस्टेंट के तौर पर ही काम कर रहे हैं। इसी तरह मार्च 2026 में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बनाए गए अधिकारी भी पोस्टिंग लंबित होने की वजह से अब तक असिस्टेंट इंजीनियर ग्रेड-I की श्रेणी में ही काम कर रहे बताए जाते हैं।
असिस्टेंट इंजीनियर ग्रेड-I के पदों की पदोन्नति प्रक्रिया में भी देरी हुई है। पदोन्नति पर विचार के लिए मार्च 2026 में डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) की बैठक हुई थी। शिकायतों के मुताबिक उस बैठक के मिनट्स अब तक मंज़ूर नहीं हुए हैं। इस वजह से उससे जुड़े पदोन्नति आदेश जारी नहीं हो सके।
दूसरे प्रशासनिक संवर्गों के जिन कर्मचारियों को पदोन्नति मिली है, वे भी पोस्टिंग का इंतज़ार कर रहे हैं। इससे संस्था के भीतर असंतोष और बढ़ा है।
इसी बीच यह आरोप भी लगा है कि जूनियर अधिकारियों को ऊंचे पदों का अतिरिक्त प्रभार दिया जा रहा है, जबकि सीनियॉरिटी लिस्ट में आने वाले वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी नज़रअंदाज़ हो रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे फैसलों से पदोन्नति के पात्र लोगों के करियर पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही तय सीनियॉरिटी नियमों और प्रशासनिक कायदों के पालन पर भी सवाल खड़े होते हैं।
प्रभावित कर्मचारियों की मांग है कि लंबित पोस्टिंग बिना और देर किए पूरी की जाएं, DPC के मिनट्स मंज़ूर किए जाएं और पात्र उम्मीदवारों को पदोन्नति आदेश दिए जाएं। उन्होंने अतिरिक्त जिम्मेदारी देते समय सीनियॉरिटी और लागू नियमों का सख्ती से पालन करने की भी मांग की है।
कर्मचारियों ने इतनी लंबी देरी का स्पष्टीकरण भी मांगा है। साथ ही लंबित फैसलों के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
इन आरोपों पर नागपुर सुधार प्रन्यास प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। मामले में आगे की कार्रवाई का इंतज़ार है।
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