नागपुर: रामदेव बाबा बिल्डर्स के पांच डायरेक्टरों पर 12.20 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी का केस
सीताबर्डी पुलिस ने अदालत के आदेश पर FIR दर्ज की है। आरोप है कि गिल्डा परिवार से निवेश के नाम पर 12.20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई।
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नागपुर की सीताबर्डी पुलिस ने रामदेव बाबा बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लि. के पांच डायरेक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि इन लोगों ने छत्तीसगढ़ के पूर्व एडवोकेट जनरल और सीनियर एडवोकेट जुगल किशोर गिल्डा और उनके परिवार के साथ निवेश के नाम पर 12.20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
यह FIR अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुई है। इसमें महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (इन फाइनेंशियल एस्टैब्लिशमेंट्स) एक्ट, यानी MPID एक्ट, और धोखाधड़ी से जुड़ी संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
जिन पांच लोगों को आरोपी बताया गया है, उनके नाम गोपाल हरिकिशन चांडक, मोहन हरिकिशन चांडक, शारदादेवी चांडक, गणेश विट्ठलदास चांडक और सुजाता मोहन चांडक हैं। ये सभी वर्धा जिले के आर्वी के रहने वाले हैं।
शिकायत के मुताबिक गिल्डा परिवार के चांडक परिवार से पुराने रिश्ते थे। निवेश की यह कथित व्यवस्था 2009 में शुरू हुई। आरोप है कि आरोपियों ने अच्छे ब्याज का वादा किया और निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उनकी रकम 28 से 29 महीने में दोगुनी हो जाएगी।
इन्हीं भरोसों पर गिल्डा, उनकी पत्नी सुनीता और बेटे अनुप ने कथित तौर पर नकद और चेक के जरिए कुल 12.20 करोड़ रुपये लगाए। आरोप है कि तय अवधि पूरी होने के बाद परिवार को न मूलधन मिला और न वादा किया गया रिटर्न।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने निवेश की सिक्योरिटी के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे, लेकिन बताया जाता है कि वे सारे चेक बाउंस हो गए। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर निवेशकों को प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का एग्रीमेंट भी किया। शिकायतकर्ता को बाद में पता चला कि वह प्रॉपर्टी पहले ही बेची जा चुकी थी। इससे लगाई गई रकम की वसूली को लेकर चिंता और बढ़ गई।
बताया गया है कि रकम न लौटाए जाने के बाद गिल्डा पहले पुलिस के पास गए। जब कोई असरदार कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) का भी दरवाजा खटखटाया। शिकायत के मुताबिक इसके बाद मामला MPID कोर्ट में ले जाया गया, जिसने पुलिस को केस दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया।
कोर्ट के इसी आदेश पर सीताबर्डी पुलिस ने FIR दर्ज की और कथित धोखाधड़ी की जांच शुरू कर दी। आरोपियों पर लगे इल्जाम जांच और अदालती कार्यवाही में साबित होना अभी बाकी है।