नागपुर में वेकोलि के रिटायर्ड कर्मचारी से 45 लाख 20 हजार रुपए की ठगी, पुलिस अफसर बनकर किया फोन
मानकापुर के 70 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया और आरटीजीएस से रकम ट्रांसफर करवा ली गई। साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
नागपुर में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) से रिटायर हुए एक 70 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर उनसे 45 लाख 20 हजार रुपए ठग लिए गए। आरोप है कि फोन करने वालों ने खुद को पुलिस का अफसर बताया और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर बुजुर्ग की जमा पूंजी अपने बताए खातों में डलवा ली।
मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित गोपाल मंडलीक सोनेकर (70) मानकापुर इलाके में रिंग रोड पर लहानोजी बाबा लेआउट के रहने वाले हैं और वेकोलि से सेवानिवृत्त हैं। 31 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर अनजान नंबरों से कॉल आने लगे। कुछ देर बाद आरोपियों ने उन्हें व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल भी किया। कॉल करने वाले खुद को मुंबई और दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसर बता रहे थे।
आरोपियों ने सोनेकर से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके एक अवैध सिम कार्ड खरीदा गया है। उनके मुताबिक उसी सिम कार्ड से असामाजिक तत्व लोगों को धमकियां दे रहे हैं। यही नहीं, आरोपियों ने सोनेकर के बैंक खाते से संदिग्ध मनी लॉन्ड्रिंग होने का आरोप भी लगाया। पुलिस अफसर बनकर बात करने वाले इन लोगों ने बुजुर्ग को इतना डरा दिया कि वे पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गए।
इसके बाद आरोपियों ने उन्हें कथित कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया। उनसे कहा गया कि अगर वे खुद को बेकसूर साबित करना चाहते हैं और कार्रवाई से बचना चाहते हैं, तो अपनी पूरी जमा पूंजी आरबीआई के अधिकृत सुरक्षा खाते में जमा करवा दें। साथ ही भरोसा दिलाया गया कि रकम की जांच और सत्यापन हो जाने के बाद उसे लौटा दिया जाएगा।
सामने वाले के पुलिस अफसर होने का यकीन करके और गिरफ्तारी के डर में सोनेकर ने अपने बचत खाते से कुल 45 लाख 20 हजार रुपए आरटीजीएस के जरिए बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
रकम पहुंचते ही आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर बंद कर दिए और बात करना बंद कर दिया। काफी देर तक कोई संपर्क नहीं हुआ, तब जाकर सोनेकर को समझ आया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने साइबर सेल पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज करवाई।
शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वालों के हौसले कितने बढ़ गए हैं। याद रखें कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। जांच के नाम पर आरबीआई के किसी खाते में पैसे जमा करने को भी नहीं कहा जाता।
ऐसे किसी भी फोन या वीडियो कॉल से घबराएं नहीं। अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी और निजी दस्तावेज किसी अनजान आदमी को न दें। कोई भी संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत पुलिस को या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर बताएं।
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