शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

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03:11 IST

नागपुर में 600 बंद CCTV कैमरों की मरम्मत के लिए 10 करोड़, 1,300 नए कैमरे भी लगेंगे

राज्य सरकार ने शहर की निगरानी और ट्रैफिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

नागपुर में 600 बंद CCTV कैमरों की मरम्मत के लिए 10 करोड़, 1,300 नए कैमरे भी लगेंगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर शहर की सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और निगरानी को पुख्ता करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह रकम शहर के उन 600 CCTV कैमरों की मरम्मत पर खर्च होगी जो फिलहाल बंद पड़े हैं।

इसके साथ ही नागपुर महानगरपालिका (NMC) की सीमा में 1,300 नए CCTV कैमरे लगाने की योजना है। तीसरे हिस्से के तौर पर 170 अहम जगहों पर दिसंबर तक इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) शुरू होने की उम्मीद है।

इन कदमों का मकसद शहर के सर्विलांस नेटवर्क की कमियां दूर करना है। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर नजर रखना और इमरजेंसी या अपराध की घटनाओं में पुलिस और नागरिक एजेंसियों का तेजी से पहुंचना भी इसका मकसद है। बंद पड़े कैमरे चालू होने से कई अहम जगहें फिर से लगातार निगरानी में आएंगी, और पूरी तरह नए कैमरों पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा ढांचा काम में लौटेगा।

पुलिस के लिए CCTV फुटेज संदिग्धों की पहचान, गाड़ियों की आवाजाही का पता लगाने, घटना को दोबारा समझने और जांच में सबूत जुटाने में काम आता है। चौराहों और सार्वजनिक जगहों पर लगे कैमरे भीड़भाड़ और ट्रैफिक की दिक्कतें पहचानने में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि मरम्मत का असर इस पर टिका रहेगा कि काम कितनी जल्दी पूरा होता है और नियमित रखरखाव का इंतजाम होता है या नहीं। कैमरे चालू रहें, फुटेज ठीक से रिकॉर्ड हो और कंट्रोल रूम को बिना रुकावट फीड मिले, यह जरूरी होगा।

NMC सीमा में आने वाले 1,300 नए कैमरों से ज्यादा सार्वजनिक जगहों, सड़कों और चौराहों पर नजर रखी जा सकेगी। कैमरे कहां लगेंगे और कब तक लगेंगे, यह तय होना अहम है, ताकि वे नेटवर्क की कमियां भरें और उन इलाकों में दोहराव न हो जहां पहले से निगरानी है। बढ़ा हुआ नेटवर्क वाहन चोरी, चेन स्नैचिंग, दूसरे सड़क अपराधों और ट्रैफिक उल्लंघन से निपटने में काम आ सकता है।

नागपुर जैसे बढ़ते शहर के लिए चुनौती सिर्फ ज्यादा कैमरे लगाना नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को एक जुड़े हुए नेटवर्क की तरह चलाना है। भरोसेमंद कनेक्टिविटी, लगातार बिजली, असरदार मॉनिटरिंग और रिकॉर्ड फुटेज तक समय पर पहुंच तय करेगी कि विस्तार का कितना फायदा मिलेगा।

ITMS में तकनीक की मदद से ट्रैफिक की निगरानी और नियंत्रण होता है। लगाए गए उपकरण और कॉन्फ़िगरेशन के हिसाब से ऐसे सिस्टम रियल टाइम में ट्रैफिक देख सकते हैं, कुछ खास उल्लंघन पकड़ सकते हैं, जाम पर नजर रख सकते हैं और व्यस्त चौराहों पर गाड़ियों की आवाजाही संभालने में अफसरों की मदद कर सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस को जाम की जगहें पहचानने, सड़कों का हाल देखने और नियम लागू कराने के बेहतर औजार मिल सकते हैं।

दिसंबर का लक्ष्य पूरा करने के लिए इंस्टॉलेशन, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और दूसरी तैयारियां समय पर निपटानी होंगी। ट्रैफिक पुलिस, महानगरपालिका और सिस्टम चलाने वाली एजेंसियों के बीच तालमेल भी जरूरी होगा।

600 बंद कैमरों की मरम्मत, 1,300 नए कैमरे और 170 जगहों पर ITMS, यह तीन हिस्सों वाली पहल नागपुर की निगरानी और ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े निवेश की योजना है। अब असली चुनौती इन घोषणाओं को भरोसेमंद, पूरे शहर के सिस्टम में बदलने की है, जिसके लिए नियमित रखरखाव, मॉनिटरिंग सेंटरों पर पर्याप्त स्टाफ, फुटेज की सुरक्षित हैंडलिंग और मिली जानकारी पर फौरन कार्रवाई जरूरी होगी। नागरिकों के लिए कसौटी यही होगी कि इससे पुलिसिंग बेहतर होती है, सड़कें सुरक्षित बनती हैं और घटनाओं पर जवाब जल्दी मिलता है।

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