नांदेड के भोकर-भैसा चेकपोस्ट पर ट्रक चालकों से पैसे लेने का आरोप, वीडियो वायरल
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नांदेड जिले के भोकर-भैसा चेकपोस्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस वीडियो में एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले ट्रक चालकों से पैसे वसूले जाते दिख रहे हैं। इस मामले के बाद नांदेड RTO दफ्तर के कामकाज को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
अवैध यात्री परिवहन, ओवरलोड ट्रक, अवैध सामान की ढुलाई और तस्करी रोकने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय परिवहन विभाग की होती है। इसी विभाग के चेकपोस्ट पर पैसे लेने के आरोप लगने से उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा पर भोकर-भैसा मार्ग पर गाड़ियों की जांच के लिए चेकपोस्ट काम करते हैं। इस रास्ते से अलग-अलग राज्यों में माल ढोने वाली कई गाड़ियां रोज गुजरती हैं। इसलिए अवैध खनिज की ढुलाई, नशीले पदार्थों की तस्करी, प्रतिबंधित सामान के परिवहन और नियम तोड़ने वाली गाड़ियों पर नजर रखने की अहम जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों पर है।
वायरल वीडियो के हवाले से आरोप लगाया जा रहा है कि गाड़ियों की सख्ती से जांच करने के बजाय ट्रक चालकों से पैसे लिए जा रहे थे। इन आरोपों से चेकपोस्ट की जांच प्रक्रिया और क्षेत्रीय परिवहन विभाग के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नांदेड जिले की सीमाएं आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक, इन तीन राज्यों से लगती हैं। इसी वजह से जिले की अंतरराज्यीय सड़कों से बड़ी संख्या में गाड़ियां गुजरती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय परिवहन विभाग के चेकपोस्ट की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
गाड़ियों के कागजात, परमिट, क्षमता से ज्यादा माल की ढुलाई और दूसरे नियमों के पालन की जांच जरूरी होती है। अवैध परिवहन और तस्करी पर लगाम कसने के लिए संबंधित एजेंसियों से चौकस रहने की उम्मीद की जाती है। लेकिन अगर चेकपोस्ट पर ही पैसे वसूली के आरोप लगें, तो इस व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
वायरल वीडियो के सिलसिले में RTO अधिकारी अमित देऊळकर का नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो में दिखाए गए कथित मामले की आधिकारिक पड़ताल, संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसकी अलग से पुष्टि होना जरूरी है। सिर्फ वीडियो वायरल होने से आरोप साबित हो गए, ऐसा नहीं माना जा सकता।
अब नजर इस पर है कि संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक सफाई आई है या नहीं, जांच शुरू हुई है या नहीं और कथित पैसे वसूली पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
चेकपोस्ट अवैध परिवहन रोकने और नियमों को लागू करने के लिए होते हैं। इसलिए वहां कथित गड़बड़ी की बात सामने आए, तो निष्पक्ष जांच होना अहम है। वायरल वीडियो की सच्चाई परखने के बाद अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो नियम के मुताबिक कार्रवाई जरूरी हो सकती है।
फिलहाल भोकर-भैसा चेकपोस्ट पर कथित पैसे वसूली के आरोपों से नांदेड RTO विभाग के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और जांच में क्या सामने आता है, यह देखना अहम होगा।