नागपुर की SDAL ने सेना को दीं 21 नागास्त्र-2 यूनिट, डिलीवरी पूरी, ECCM से लैस है सिस्टम
नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने गुरुवार को भारतीय सेना को नागास्त्र-2 की 21 यूनिट सौंपीं।
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नागपुर की रक्षा कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना के हवाले नागास्त्र-2 लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम की 21 यूनिट कर दीं। कंपनी का कहना है कि इसके साथ ही सेना को इस प्रणाली की डिलीवरी पूरी हो गई है। फैक्ट्री से यह खेप कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रवाना की गई। देश के अंदर ही हथियार और रक्षा उपकरण बनाने की जो कोशिश चल रही है, उसमें इसे एक और अहम कदम माना जा रहा है।
डिलीवरी से पहले इस सिस्टम को परखा गया था। अगस्त 2026 में राजस्थान के बीकानेर में बने महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) पर नागास्त्र-2 के तकनीकी ट्रायल हुए। कंपनी के मुताबिक वहां सेना के बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स के सामने सिस्टम के कामकाज के पैमाने और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) की परफॉर्मेंस को जांचा गया। सेना के जवानों ने खुद इसका काम देखा और नतीजा कामयाब रहा। कंपनी बताती है कि इलेक्ट्रॉनिक जंग जैसे मुश्किल हालात में भी टेस्ट पास हुए, और इसके बाद ही डिलीवरी का काम पूरा किया गया। अब यह सिस्टम सेना में तैनाती के लिए तैयार बताया जा रहा है।
नागास्त्र-2 खास तौर पर बख्तरबंद टारगेट पर सटीक वार के लिए बना है। इसके दो मोड हैं: रिकवर-एंड-रीयूज और फायर-एंड-फॉरगेट। इससे इस्तेमाल करने वालों को काफी छूट मिलती है। रिकवर-एंड-रीयूज मोड में यह 25 किलोमीटर तक मार कर सकता है, जबकि फायर-एंड-फॉरगेट मोड में इसकी पहुंच 50 किलोमीटर तक है। यह एक घंटे यानी 60 मिनट तक आसमान में टिका रह सकता है।
इसमें दिन और रात, दोनों वक्त काम करने वाले कैमरे और सेंसर लगे हैं, जो अलग-अलग तरह के निशानों को ढूंढने और ट्रैक करने के काम आते हैं, बख्तरबंद गाड़ियां भी इनमें शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक इसका विजन-बेस्ड ट्रैकिंग और ऑटोनॉमस गाइडेंस सिस्टम तब भी निशाने पर नजर रखने में मदद करता है, जब GPS सिग्नल बंद हो जाए।
वारहेड की बात करें तो नागास्त्र-2 में देश में ही बना 4 किलो का टैंडम शेप्ड-चार्ज एंटी-टैंक वारहेड लगा है। कंपनी का दावा है कि यह एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) को बेअसर कर सकता है और 650 मिमी तक मोटे रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) को भेद सकता है। हालांकि कंपनी ने खुद यह भी माना है कि इसका असल असर हालात और टेस्ट के पैमानों पर निर्भर करता है।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी ECCM ताकत बताई जा रही है। आज के जंग के मैदान में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे खतरे बिना पायलट वाले और सटीक निशाने वाले सिस्टम का काम बिगाड़ सकते हैं। नागास्त्र-2 में एंटी-जैमिंग, एंटी-स्पूफिंग और मल्टी-मोड कम्युनिकेशन जैसी सुविधाएं दी गई हैं, ताकि यह ऐसे माहौल में भी चलता रहे। सशस्त्र बल अब देश में बने और तकनीक पर टिके सिस्टम ज्यादा चाहते हैं, और ताजा डिलीवरी से इस दिशा में SDAL का योगदान बढ़ा है। उम्मीद है कि इससे देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विकास को और बढ़ावा मिलेगा।
इससे पहले नागास्त्र-1R का ऑर्डर
कंपनी के मुताबिक SDAL को 2025 में भारतीय सेना से करीब 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्यूनिशन का ऑर्डर भी मिल चुका है। नागास्त्र-1R में बार-बार इस्तेमाल होने वाला लॉन्चर सिस्टम और 360 डिग्री घूमने वाला गिंबल कैमरा है। रात के ऑपरेशन के लिए इसमें थर्मल कैमरा भी लगाया जा सकता है। वीडियो और टेलीमेट्री के लिए यह कंपनी की अपनी एन्क्रिप्शन तकनीक पर चलता है, और इसकी निशाना लगाने की सटीकता दो मीटर सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) बताई गई है।
कंपनी का कहना है कि नागास्त्र-1R में 80 फीसदी से ज्यादा पुर्जे और सामान देश के ही हैं। SDAL के मुताबिक इस सिस्टम को लद्दाख और उत्तर प्रदेश में झांसी के पास बबीना समेत कई जगहों पर आजमाया जा चुका है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी और नागास्त्र-1R के ऑर्डर, दोनों को मिलाकर देखें तो नागपुर की यह कंपनी सेना को देशी लॉइटरिंग म्यूनिशन तकनीक देने में अपनी भूमिका लगातार बढ़ा रही है।
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