नागपुर: 16 साल की लड़की को बंद रखने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज, 550 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
दिघोरी के किराए के फ्लैट में नाबालिग से कथित मारपीट और यौन उत्पीड़न के मामले में ठाणे का 19 साल का आरोपी नागपुर सेंट्रल जेल में है। हुडकेश्वर पुलिस ने 40 गवाहों के बयान वाली चार्जशीट पेश की है।
नागपुर के दिघोरी में किराए के एक फ्लैट में 16 साल की लड़की को कथित तौर पर बंधक बनाकर उसके साथ बेरहमी से मारपीट और यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। इस मामले में गिरफ्तार ठाणे का 19 साल का आरोपी 70 दिन से ज्यादा बीत जाने के बाद भी नागपुर सेंट्रल जेल में बंद है। कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। पुलिस अब पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत जल्द सुनवाई की तैयारी में लगी है।
हुडकेश्वर पुलिस ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में 550 पन्नों की भारी-भरकम चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। इसमें 40 गवाहों के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए सबूत शामिल हैं। फिर भी जांच अभी पूरी नहीं हुई है। कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आते ही पुलिस पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
पुलिस का मानना है कि डिजिटल सबूत घटनाक्रम को साबित करने में अहम साबित हो सकते हैं। उनसे यह भी पता चल सकता है कि आरोपी की कथित हरकतों की कोई और पीड़िता तो नहीं है। अधिकारी जब्त उपकरणों में ऐसी सामग्री खंगाल रहे हैं जिससे अभियोजन का पक्ष मजबूत हो और आरोपी की गतिविधियों के बारे में और जानकारी मिल सके।
मामला 3 अगस्त को सामने आया, जब हुडकेश्वर पुलिस ने दिघोरी के उस किराए के फ्लैट से नाबालिग को छुड़ाया। आरोप है कि लड़की को 24 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ गंभीर शारीरिक व यौन प्रताड़ना की गई। पुलिस वाले जब फ्लैट के अंदर पहुंचे तो हालात देखकर सन्न रह गए। लड़की बिस्तर से बंधी हुई थी, खून बह रहा था और उसके तन पर मुश्किल से कपड़े थे।
आरोपी को 4 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे प्रताड़ित किया और यह बात कोर्ट के सामने रखी। इसके बाद उसे इलाज के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया। छुट्टी मिलने के बाद उसे नागपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया, जहां वह न्यायिक हिरासत में है।
आरोपी के लिए यह एक और झटका रहा कि उसके वकील की हाल की जमानत अर्जी कोर्ट ने नामंजूर कर दी। बचाव पक्ष ने केस को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की भी मांग की थी, लेकिन प्रधान जिला न्यायाधीश ने वह अर्जी भी ठुकरा दी।
इधर लड़की को इस सदमे से उबारने की कोशिशें चल रही हैं। बाल कल्याण समिति (CWC) की व्यवस्था से मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की मदद मिल रही है। वह पढ़ाई में लौट आई है और परीक्षा की तैयारी फिर शुरू कर दी है। समिति ने लड़की और उसके परिवार के लिए फैमिली काउंसलिंग की भी सिफारिश की है। एक सूत्र के मुताबिक लड़की को दी जा रही मदद का अच्छा असर हो रहा है।
जांच करने वालों ने चार्जशीट में मेडिकल जांच के नतीजे और उन हालात की जानकारी शामिल की है जिनमें लड़की को कथित तौर पर कैद रखा गया था। जब्त उपकरणों की आने वाली फॉरेंसिक जांच को जांच का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। पुलिस का पूरा ध्यान अब डिजिटल सबूत निकालने और उन्हें परखने पर है। अधिकारियों का कहना है कि इससे केस ट्रायल की ओर बढ़ते हुए मजबूत होगा, हालांकि कोई भी नया आरोप सामने आए तो उसकी अलग से स्वतंत्र जांच और पुष्टि जरूरी होगी।