नाग नदी की सफाई के लिए 1,927 करोड़ की योजना, 62 करोड़ की पहली किस्त मंजूर
नागपुर की नाग नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने की योजना पर करीब 1,927 करोड़ रुपये खर्च होंगे और शुरुआती चरण के लिए लगभग 62 करोड़ रुपये की पहली किस्त को हरी झंडी मिल गई है।
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नागपुर की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर मानी जाने वाली नाग नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। नदी को फिर से साफ करने की इस योजना पर करीब 1,927 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मकसद है कि नदी का पुराना वैभव लौट आए।
काम को जमीन पर उतारने के लिए पहली किस्त के तौर पर लगभग 62 करोड़ रुपये को हरी झंडी दे दी गई है। यह रकम शुरुआती चरण पर खर्च होगी और इसी से इस बड़ी परियोजना की नींव मजबूत होगी।
पैसा एसएनए-स्पर्श नाम की व्यवस्था के जरिए भेजा जाएगा। इसे आधुनिक और पारदर्शी सिस्टम बताया गया है। मकसद यह है कि प्रशासनिक देरी और पैसे की अड़चनें पूरी तरह खत्म हों। पर्यावरण विभाग ने तय किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए सीधे लेन-देन हो, ताकि मंजूर की गई रकम बिना किसी रुकावट के सीधे विकास कामों में लग सके।
हिस्सेदारी का ब्योरा इस तरह है। केंद्र सरकार 37 करोड़ 18 लाख रुपये देगी, जो 60 प्रतिशत योगदान है। महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा 15 करोड़ 49 लाख रुपये यानी 25 प्रतिशत है, जबकि नागपुर महानगरपालिका यानी नगर निगम 29 करोड़ 29 लाख रुपये देगी, जो 15 प्रतिशत योगदान है।
इसके अलावा परामर्शदाता एजेंसी पर होने वाला 78 करोड़ से ज्यादा का पूरा खर्च सीधे केंद्र सरकार उठाएगी। बाकी विकास काम तय हिस्सों के हिसाब से पूरे किए जाएंगे।
गंदा पानी नदी में न मिले, इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP पर जोर दिया जा रहा है। नदी के दोनों किनारों के सौंदर्यीकरण की भी योजना है, और गंदे पानी को नदी में जाने से रोकने की पुख्ता व्यवस्था की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना जमीन पर उतरी तो नाग नदी का प्रदूषण स्तर कम होगा और शहर के भूजल स्तर में भी सुधार देखने को मिलेगा।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रशासन यह पक्का करे कि परियोजना तय समय-सीमा के भीतर पूरी हो, ताकि नागपुरवासियों को जल्द से जल्द एक साफ, सुंदर और प्रदूषणमुक्त नाग नदी मिल सके।