गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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मुंबई में पुनर्विकास की लहर से किराये के घरों की मांग बढ़ी, मकान मालिकों का रिटर्न सुधरा

मुंबई में पुनर्विकास की लहर से किराये के घरों की मांग बढ़ी, मकान मालिकों का रिटर्न सुधरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

पुरानी इमारतों के पुनर्विकास से मुंबई में किराये के घरों की मांग टिकी हुई है। किराया बढ़ा है और मकान मालिकों व निवेशकों का रेंटल यील्ड बेहतर हुआ है।

मुंबई में पुनर्विकास का दौर अब सिर्फ पुरानी इमारतों की जगह नए टावर खड़े करने तक सीमित नहीं रहा। इसका असर पूरे शहर के किराया बाजार पर दिख रहा है। किराये के घरों की मांग लगातार बनी हुई है, घरों का किराया बढ़ रहा है और मकान मालिकों व निवेशकों को किराये से मिलने वाला रिटर्न पहले से बेहतर हो रहा है।

पिछले पांच साल में पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स की संख्या में अनुमानित 66 प्रतिशत का सीएजीआर दर्ज हुआ है। इससे साफ दिखता है कि पूरे मुंबई में पुरानी इमारतों का पुनर्विकास तेजी से बढ़ रहा है। जैसे-जैसे ज्यादा सोसायटियां पुनर्विकास की तरफ जा रही हैं, वहां के रहने वाले अपने मौजूदा इलाके के पास, स्कूल, काम की जगह और जान-पहचान के दायरे के नजदीक किराये का घर ढूंढ रहे हैं। इससे स्थानीय किराया बाजार पर दबाव पड़ रहा है। यह असर खासकर उन पुराने बसे इलाकों में ज्यादा है जहां उपलब्ध घर पहले से कम हैं।

मुंबई के पुनर्विकास की एक खास बात यह है कि किराये की इस मांग का बड़ा हिस्सा खुद डेवलपर उठा रहे हैं। कई प्रोजेक्ट्स में जब तक पुनर्विकास पूरा नहीं होता, तब तक बेघर हुए निवासियों को डेवलपर की तरफ से अस्थायी किराया दिया जाता है। इसी वजह से ये परिवार लंबे समय तक, अक्सर कई साल, किराये के बाजार में सक्रिय ग्राहक बने रहते हैं।

कोरोना महामारी के बाद यह ट्रेंड और तेज हुआ, क्योंकि लोगों की घर को लेकर पसंद में बड़ा बदलाव आया। बड़े घर, बेहतर निर्माण, सुधरी हुई सुविधाएं और रहने का कुल मिलाकर अच्छा अनुभव कई परिवारों के लिए अहम हो गया। पुरानी इमारतों में रहने वाले लोग इसी इलाके में नए और बेहतर घर में जाने का मौका मिलने पर पुनर्विकास का रास्ता चुनने को उत्सुक हुए। बीच के दौर में कई लोगों ने तुलनात्मक रूप से नए घर किराये पर लेना पसंद किया, जो पुरानी बिल्डिंगों के मुकाबले आम तौर पर ज्यादा महंगे होते हैं।

कोटक महिंद्रा बैंक में होम लोन्स विभाग के प्रमुख नकुल सक्सेना ने कहा, "मुंबई पुरानी इमारतों की जगह नई इमारतें बना रहा है, ऐसे में पुनर्विकास का असर किराये और मालिकाना हक, दोनों बाजारों पर पड़ रहा है। घरों की क्वालिटी सुधारने के अलावा यह बदलाव रिहायशी रियल एस्टेट की आर्थिक हालत भी बेहतर कर रहा है। बढ़ता किराया और बेहतर रेंटल यील्ड की वजह से रिहायशी प्रॉपर्टी सिर्फ खुद रहने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि स्थिर और लंबे समय का रिटर्न तलाशने वाले निवेशकों के लिए भी आकर्षक बन रही है।"

मुंबई का किराया बाजार परंपरागत रूप से बाहर से आने वालों और रोजगार की बढ़त पर टिका रहा है। अब पुनर्विकास एक और अहम वजह बनकर उभर रहा है। बार-बार घर बदलने वाले कई प्रवासी किरायेदारों के मुकाबले पुनर्विकास से प्रभावित परिवार अपने नए घर तैयार होने तक कई साल एक ही जगह किराये पर रहते हैं। इससे लगातार मांग बनी रहती है और कुछ खास इलाकों में किराये के लिए उपलब्ध घर कम हो जाते हैं।

नतीजा यह है कि मुंबई के कई हिस्सों में किराये के घरों की मांग बढ़ी है। कुछ इलाकों में पुनर्विकास के काम और सीमित सप्लाई के एक साथ आने से घरों का किराया आम महंगाई दर से कई गुना बढ़ा है। बढ़े हुए किराये से मकान मालिकों और निवेशकों का रेंटल रिटर्न सुधरा है और रिहायशी रियल एस्टेट कुछ साल पहले के मुकाबले कमाई देने वाली ज्यादा आकर्षक प्रॉपर्टी बन गई है। कई स्थानीय माइक्रो मार्केट में पूंजी मूल्य की बढ़त के साथ किराये की आमदनी कुल रिहायशी रिटर्न का बेहद अहम हिस्सा बनती जा रही है।

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