बुधवार, 16 सितमबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
23:26 IST

रोशन भोंडेकर की किताब 'जीवन की पहली पाठशाला' जनवरी 2027 में प्रभात प्रकाशन से आएगी

भंडारा के तुमसर और नागपुर से जुड़े लेखक रोशन भोंडेकर की किताब माता-पिता के त्याग और संघर्ष पर केंद्रित है।

रोशन भोंडेकर की किताब 'जीवन की पहली पाठशाला' जनवरी 2027 में प्रभात प्रकाशन से आएगी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर से ताल्लुक रखने वाले लेखक रोशन भोंडेकर की एक नई हिंदी किताब जनवरी 2027 में पाठकों के सामने आने वाली है। किताब का नाम है 'जीवन की पहली पाठशाला - माता-पिता से मिली जीवन की राह', और इसे छाप रहा है हिंदी प्रकाशन जगत का जाना-माना नाम प्रभात प्रकाशन।

किताब का पूरा फोकस माता-पिता की जिंदगी, उनके संघर्ष, उनके त्याग और घर की जिम्मेदारियों पर है। साथ ही यह भी दिखाया गया है कि बच्चों की पर्सनैलिटी बनाने में माता-पिता का रोल कितना बड़ा होता है।

किताब के पीछे की सोच यह है कि इंसान की पहली शिक्षा स्कूल से नहीं, बल्कि घर से ही शुरू हो जाती है। बोलना सीखना हो, चलना सीखना हो या फिर बर्ताव करना - इसके अलावा फैसले लेना, मुश्किल हालात का सामना करना और समाज की वैल्यूज को समझना, इन सबमें माता-पिता और परिवार का असर जिंदगी भर बना रहता है।

लेखक रोशन भोंडेकर की फैमिली बैकग्राउंड भंडारा जिले के तुमसर और नागपुर इलाके से जुड़ी हुई है। किताब में इन्हीं पारिवारिक अनुभवों और यादों के जरिए माता-पिता की जिंदगी को समझने की कोशिश की गई है। इसमें उन हालातों का भी जिक्र है जब सीमित साधनों के बावजूद माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य को हमेशा पहले रखा।

किताब की एक खास बात यह है कि बचपन की जो घटनाएं उस वक्त बहुत मामूली लगती थीं, उन्हें अब बड़ी उम्र की समझ के साथ देखने की कोशिश की गई है। माता-पिता के फैसले, मुश्किल वक्त में उनका सब्र, परिवार के लिए उनकी जिम्मेदारियां और बच्चों के लिए किए गए समझौते - ये सब बातें उस वक्त पूरी तरह समझ नहीं आतीं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इनकी अहमियत साफ होती जाती है।

माता-पिता के रोल पर बनी यह कहानी सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है। भारत के कई घरों में अगली पीढ़ी के भविष्य के लिए माता-पिता निजी त्याग करते आए हैं और सामाजिक-आर्थिक मुश्किलों का सामना करते रहे हैं। इस लिहाज से किताब निजी यादों के जरिए एक बड़े पारिवारिक अनुभव को दर्ज करने की कोशिश करती है। लेखक ने अपने माता-पिता की जिंदगी और उनसे मिली सीख को उनके जीते-जी ही शब्दों में उतारने की कोशिश की है।

आजकल की बदलती लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी रूटीन के बीच परिवार के साथ बातचीत और समय बिताने में जो बदलाव आया है, उससे भी यह विषय आज के दौर से जुड़ जाता है।

प्रभात प्रकाशन हिंदी किताबों के प्रकाशन में दशकों से सक्रिय है। इसकी शुरुआत 1950 में मथुरा में श्याम सुंदर ने की थी और 1958 में यह दिल्ली शिफ्ट हो गया, जिसके बाद इसने अपना काम और बढ़ाया। प्रकाशक के मुताबिक अब तक यह संस्थान अलग-अलग विषयों पर हजारों किताबें छाप चुका है, जिनमें साहित्य, कथा, इतिहास, व्यक्तित्व विकास, बाल साहित्य और विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। इसकी लिस्ट में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, अटल बिहारी वाजपेयी, सुधा मूर्ति, चेतन भगत, दीपक चोपड़ा, रॉबिन शर्मा, वर्गीज कुरियन और आर.ए. माशेलकर जैसे बड़े नाम भी रहे हैं।

प्रभात प्रकाशन 1995 से हिंदी की मासिक पत्रिका 'साहित्य अमृत' भी निकाल रहा है, और इसके कैटलॉग में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की 'हिंदी साहित्य का इतिहास' जैसी अहम किताबों के नए एडिशन भी शामिल हैं। इसी बड़ी परंपरा के बीच 'जीवन की पहली पाठशाला' जनवरी 2027 में पाठकों तक पहुंचेगी।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे