मुंबई में सूखे कचरे के केंद्रों का होगा कायापलट, BMC खर्च करेगी 23 करोड़ 38 लाख रुपये
मुंबई के पारंपरिक सूखा कचरा वर्गीकरण केंद्रों को आधुनिक रिसोर्स रिकवरी केंद्रों में बदला जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर 23 करोड़ 38 लाख रुपये का खर्च है।
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मुंबई शहर में सूखे कचरे की छंटाई के जो पुराने केंद्र चल रहे हैं, उन्हें अब आधुनिक 'रिसोर्स रिकवरी केंद्र' बनाया जाएगा। इसके लिए 23 करोड़ 38 लाख रुपये का एक बड़ा प्रोजेक्ट हाथ में लिया गया है।
पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी प्लानिंग, निगरानी और अमल के लिए 'राइट्स लिमिटेड' को तकनीकी सलाहकार बनाया गया है। इस संस्था को 92.57 लाख रुपये फीस देने का प्रस्ताव नगर निगम की स्थायी समिति के सामने मंजूरी के लिए रखा गया है।
निगम ने जिन नामी सलाहकार संस्थाओं की सूची बना रखी है, उन्हीं में से राइट्स लिमिटेड को चुना गया है। अतिरिक्त आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ने तकनीकी क्षमता, टिकाऊपन, कार्यक्षमता और आर्थिक मॉडल, इन कसौटियों पर जांच करके यह सिफारिश की। इसके बाद राइट्स लिमिटेड ने जगह का मुआयना किया और तकनीकी नक्शा, मशीनरी का ब्योरा और अनुमानित खर्च का हिसाब तैयार कर लिया है।
कचरे में 30 से 40 फीसदी हिस्सा प्लास्टिक, कागज और दोबारा इस्तेमाल लायक चीजों का यानी सूखे कचरे का होता है। मौजूदा वर्गीकरण केंद्रों की सीमाओं को देखते हुए निगम पाँच अहम जगहों पर कारगर मशीनें लगाएगा और साफ-सुथरा तरीका अपनाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा सामान दोबारा इस्तेमाल के लिए अलग किया जा सके।
इससे डंपिंग ग्राउंड पर जाने वाले कचरे की मात्रा काफी घटने की उम्मीद है। साथ ही रीसाइक्लिंग की कड़ी मजबूत होगी और असंगठित क्षेत्र के कचरा बीनने वालों के लिए इज्जत की रोजी-रोटी का रास्ता भी खुलेगा।
सलाहकार संस्था के जिम्मे सिर्फ नक्शा बनाना नहीं है। टेंडर प्रक्रिया में मदद, मशीनरी की स्थापना, असल काम की क्वालिटी, टेस्टिंग और संबंधित कर्मचारियों को ट्रेनिंग देना भी उसकी जिम्मेदारी होगी।
असल प्रोजेक्ट पर करीब 23 करोड़ 37 लाख 76 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है, जबकि सलाहकार संस्था को 92 लाख 57 हजार 185 रुपये दिए जाएंगे। स्थायी समिति की आखिरी मंजूरी मिलते ही इस काम की टेंडर प्रक्रिया और असल अमल युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा।