मणिपुर के पहाड़ी जिलों में फिर भड़की हिंसा, कुकी और नागा आमने-सामने
मणिपुर के पहाड़ी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच हिंसा से दर्जनों जानें गई हैं।
इम्फाल: मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा भड़कने के तीन साल बाद मणिपुर में अब एक नए मोर्चे पर टकराव शुरू हो गया है। 2026 में कुकी और नागा समुदाय ऐसे जिलों में आमने-सामने आ गए हैं, जो शुरुआती हिंसा के दौरान काफी हद तक अछूते रहे थे।
इम्फाल घाटी में हालात तुलनात्मक रूप से शांत रहे हैं। हिंसा ज्यादातर पहाड़ी जिलों उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, नोने, तामेंगलॉन्ग और सेनापति में सिमटी हुई है।
हिंसा का यह नया दौर 7 फरवरी को शुरू हुआ। उस दिन कुकियों के एक गुट ने उखरुल जिले के लिटन सारेखोंग में एक तांगखुल नागा आदमी पर हमला किया। तीन दिन के अंदर उखरुल जिले में दंगे भड़क उठे, करीब 50 घर जला दिए गए, कर्फ्यू लगाना पड़ा और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इस साल सितंबर में कुकी और नागा समुदायों के बीच हुई हिंसा में कम से कम 19 लोगों की जान गई।
अक्टूबर के पहले पखवाड़े में कम से कम 13 और लोगों ने जान गंवाई। इनमें से 12 लोग 10 अक्टूबर को खत्म हुए दो दिनों में कामजोंग, कांगपोकपी और उखरुल जिलों में हुई टारगेटेड हत्याओं और हमलों में मारे गए।
नागा संगठनों ने कुकी-जो गुटों पर, खासकर केएनएफ-पी और केआरए पर, आरोप लगाया है। ये गुट सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स करार के तहत आते हैं। नागा संगठनों का कहना है कि मई से सितंबर के बीच कम से कम पांच जानलेवा हमलों में ये शामिल थे। इन गुटों ने किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है, और अभी तक किसी आधिकारिक जांच में उनकी जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। उधर कुकी संगठनों ने एनएससीएन-आईएम और जेडयूएफ-के को जिम्मेदार ठहराया है।
एनएससीएन-आईएम का केंद्र सरकार के साथ अपना अलग संघर्षविराम करार है। एसओओ करार 22 अगस्त 2008 को केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और दो कुकी-जो गुटों, कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन और यूनाइटेड पीपल्स फ्रंट के बीच हुआ था। इसका मकसद इन हथियारबंद गुटों को राजनीतिक बातचीत की मेज पर लाना था। नागा और मैतेई गुटों ने एसओओ करार रद्द करने की मांग की है।
पहाड़ी इलाकों में हिंसा चल रही है और इसी बीच हथियारबंद गुट मैतेई बहुल इम्फाल घाटी में दबाव बढ़ा रहे हैं। 15 अक्टूबर को प्रतिबंधित कांगलेपाक कम्युनिस्ट पार्टी ने 12 घंटे का बंद बुलाया, जिससे पूरे राज्य में जनजीवन ठप हो गया। 1949 में मणिपुर के भारत में विलय की याद में इस गुट ने 15 अक्टूबर को काला दिन मनाया।