महानिर्मिती के पास सिर्फ चार दिन का कोयला, दिवाली से पहले बिजली संकट का अंदेशा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक महानिर्मिती के सात प्रोजेक्ट्स में सिर्फ चार दिन का कोयला बचा है।
राज्य में बिजली की मांग बढ़ रही है और उसी के साथ कोयले की किल्लत भी गहराती जा रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट से चौंकाने वाली बात सामने आई है कि महानिर्मिती (Maharashtra State Power Generation Company Limited) के पास सिर्फ चार दिन का कोयला बचा है।
रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में महानिर्मिती के सात प्रोजेक्ट्स हैं और इन सभी में मिलाकर चार दिन का ही स्टॉक है। इनमें से पांच प्रोजेक्ट्स गंभीर स्टॉक की श्रेणी में आ गए हैं। यानी सात में से पांच जगह हालत सबसे ज्यादा नाजुक बताई गई है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के प्रोजेक्ट्स के पास तय स्टॉक का 31 प्रतिशत कोयला बचा है। महानिर्मिती की हालत इससे भी खराब है, उसके पास तय स्टॉक का सिर्फ 17 प्रतिशत कोयला बचा है। फिलहाल महानिर्मिती के प्रोजेक्ट्स में 5 लाख 81 हजार 400 टन कोयले का स्टॉक है, जबकि राज्य में बिजली की मांग 28 से 30 हजार मेगावाट के बीच चल रही है।
पूरे देश की बात करें तो थर्मल बिजली प्रोजेक्ट्स के पास आठ दिन चल सके, इतना कोयला उपलब्ध है। महाराष्ट्र का स्टॉक इस औसत से काफी नीचे है, और यही फिक्र की असली वजह है।
इस मामले में महानिर्मिती का कहना है कि स्टॉक बढ़ाने के लिए वक्त रहते प्लानिंग की जा रही है। कंपनी ने जानकारी दी है कि बढ़ती मांग को देखते हुए कोयले की सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र, राज्य और रेलवे प्रशासन के तालमेल से योजना पर काम चल रहा है।
परेशानी इसलिए और बढ़ती दिख रही है कि देशभर में आने वाले कुछ दिनों में दिवाली का त्योहार है। आम दिनों के मुकाबले इस दौरान बिजली का इस्तेमाल कुछ हद तक ज्यादा होता है। ऐसे में कोयले की कमी के चलते दिवाली के ठीक पहले बिजली का नया संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि मांग ऊपर जा रही है, स्टॉक नीचे आ रहा है और त्योहार सिर पर है। अब नजर इस पर रहेगी कि केंद्र, राज्य और रेलवे के तालमेल से बनी योजना के तहत महानिर्मिती के प्रोजेक्ट्स तक कोयला कितनी जल्दी पहुंचता है।
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