एसटी में NCMC कार्ड जरूरी करने पर बरगे का आरोप, रियायत के नाम पर यात्रियों की जेब पर बोझ
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महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने कहा कि एसटी महामंडल कार्ड अनिवार्य करके आम यात्रियों से वसूली कर रहा है। उन्होंने जबरदस्ती तुरंत रद्द करने की मांग की है।
मुंबई: महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) ने राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड (एनसीएमसी) स्मार्ट कार्ड अनिवार्य कर दिया है और इससे आम यात्रियों की जेब पर बोझ पड़ रहा है। यह तीखा आरोप महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी काँग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने लगाया है। उनका कहना है कि यात्रियों की सहूलियत के लिए शुरू की गई यह योजना एसटी प्रशासन के गलत अमल की वजह से यात्रियों के साथ कंडक्टरों के लिए भी सिरदर्द बन गई है।
बरगे के मुताबिक केंद्र सरकार की "एक राष्ट्र, एक कार्ड" की सोच के तहत एक ही कार्ड से देशभर में मेट्रो, बस, टोलनाके और दूसरी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का फायदा मिलना चाहिए। यही इस योजना का असली मकसद है। लेकिन उनका आरोप है कि एसटी महामंडल ने इसी सोच को ताक पर रख दिया।
एसटी महामंडल ने 1 अप्रैल 2026 से रियायत पाने वालों के लिए 199 रुपये का यह कार्ड अनिवार्य किया और 1 सितंबर से पुराने पास बंद कर दिए। नतीजा यह है कि विद्यार्थी, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक रियायत लेने के लिए कार्ड खरीदने पर मजबूर हैं। कार्ड न हो तो रियायत नहीं दी जाती। बरगे ने इस जबरदस्ती को आम यात्रियों पर थोपा गया अन्याय कहा।
नेटवर्क और रिचार्ज की दिक्कतों पर बरगे ने कहा, "महामंडल ने 12 अगस्त तक एक करोड़ रजिस्ट्रेशन होने का दावा किया है। लेकिन गांवों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या है, ई-टिकट मशीनों से कार्ड रिचार्ज नहीं होता और कार्ड में बची रकम का ब्योरा भी नहीं दिखता। कार्ड होने के बावजूद रियायत नहीं मिलती, इसलिए यात्रियों को फिर से टिकट निकालना पड़ता है। इस तरह उन पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।"
उन्होंने यह भी बताया कि एसटी का कार्ड दूसरी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में नहीं चलता, इसलिए यात्रियों को अलग-अलग कार्ड रखने पड़ते हैं। दूसरी तरफ बैंकों की तरफ से जारी एनसीएमसी कार्ड कई परिवहन सेवाओं में चलते हैं। ऐसे में एसटी के कार्ड की सीमित उपयोगिता यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है।
बरगे का आरोप है कि ई-बिक्सकैश और एनएसडीएल पेमेंट्स बैंक के जरिए दिया जाने वाला यह कार्ड गांव के लोगों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने के लिए है, मगर एसटी महामंडल ने इसका इस्तेमाल सिर्फ सरकार से मिलने वाली रियायत की रकम का हिसाब रखने के लिए किया है। उन्होंने सवाल उठाया, "यात्रियों को सुविधा देने की जगह उन पर जबरदस्ती करना, तकनीकी दिक्कतों को अनदेखा करना और रियायत के लिए अलग से खर्च कराना, यह कौन सा यात्रियों के हित का फैसला है?"
बरगे ने मांग की है कि योजना के अमल में कंडक्टरों को आ रही तकनीकी दिक्कतों और कार्ड की जबरदस्ती से महामंडल की आमदनी पर पड़े असर को देखते हुए एसटी महामंडल यह अनिवार्यता तुरंत रद्द करे और कार्ड को ऐच्छिक बनाए। साथ ही इसे आम यात्रियों के लिए भी उपलब्ध कराया जाए और मुंबई मेट्रो, बेस्ट, पुणे मेट्रो समेत दूसरी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में इसका इस्तेमाल मुमकिन किया जाए।
उनका कहना है कि जब तक यात्रियों को असल सुविधा नहीं मिलती, तब तक कार्ड की जबरदस्ती जारी रखना उनके आर्थिक नुकसान को जानबूझकर अनदेखा करना है। उन्होंने एसटी प्रशासन से अपील की है कि वह तुरंत फैसला लेकर यात्रियों को राहत दे।
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